Thursday, September 1, 2016

सुनपेड़ की सीबीआई जांच प्रगति पर और आरक्षण आंदोलन की जाँच भी सीबीआई करेगी;-खट्टर



चंडीगढ़, सितंबर 01,2016(abtaknews.com )हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि प्रदेश में पुलिस कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं ताकि वे प्रदेश में कानून-व्यवस्था कायम रखने में अपना बेहतर योगदान दे सकें।  मुख्यमंत्री आज यहां हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के अंतिम दिन नेता प्रतिपक्ष श्री अभय सिंह चौटाला के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का उत्तर दे रहे थउन्होंने कहा कि हरियाणा ऐसा पहला राज्य है जिसने पुलिस कर्मचारियों के लिए साप्ताहिक अवकाश की घोषणा की है। इसके अतिरिक्त, हम नई भर्तियां करने उपरांत एक ऐसा प्रावधान करने जा रहे हैं जिसके अनुसार पुलिस कर्मचारी शिफ्टों में अपनी डयूटी कर सकेंगे। अब तक उन्हें 24 घंटे काम करना पड़ता है। हम प्रक्रिया पूरी होने के बाद शीघ्र ही इसकी घोषणा करेंगे। इसके अतिरिक्त, महिला पुलिस थानों में अलग से जांच विंग की स्थापना का मुद्दा विचाराधीन है। 
उन्होंने बताया कि सुनपेड़ मामले के संबंध में सीबीआई जांच प्रगति पर है। सरकार अपराधों पर अंकुश लगाने और कानून-व्यवस्था कायम करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले विपक्ष अनियमितताओं की सीबीआई जांच का आग्रह करता था, परंतु वर्तमान सरकार ने उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ऐसे मामलों को पहले ही सीबीआई को दे दिया है। 
आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसा के संबंध में जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बारे में उन्होंने कहा कि यह पता लगाने के लिए सीबीआई को सौंपा गया है कि इस मामले में कहीं कोई साजिश तो नहीं थी। प्रकाश सिंह कमेटी ने दो भागों में अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी है, जिसमें से एक को सार्वजनिक किया गया है। दूसरी रिपोर्ट पुलिस के आधुनिकीकरण और इसकी कार्यप्रणाली में सुधार के बारे में है। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई है। अपलोड की गई रिपोर्ट के अनुसार पुलिस तथा सिविल अधिकारियों के विरुद्ध पहले की कार्रवाई की गई है, जिसमें निलंबन, स्थानांतरण, विभागीय कार्रवाई इत्यादि शामिल है। एफआईआर के संबंध में उन्होंने कहा कि सरकार ने पुलिस थाने में शिकायत तथा एफआईआर दर्ज करना आसान बनाने के लिए कई प्रावधान किये हैं। 
हरियाणा प्रदेश में सन 2005 से 2014 के अंतराल में पिछली सरकार के लगभग 10 वर्षों के शासनकाल में कानून व व्यवस्था की स्थिति निरंतर खराब हुई थी। अक्टूबर 2014 में जब प्रदेश की जनता ने वर्तमान लोकप्रिय सरकार को चुनकर भेजा तब प्रदेश की कानून व्यवस्था पूरी तरह बिगड़ी हुई थी। जनता अपराधियों तथा शरारती तत्वों से बुरी तरह परेशान थी। इसलिए वर्तमान सरकार ने कार्यभार संभलते ही कानून व्यवस्था की स्थिति में सुधार लाने की दिशा में अनेक कदम उठाए। सरकार के लगभग 22 महीने के कार्यकाल में कानून और व्यवस्था की स्थिति में निरंतर सुधार आया है और लोगों में सुरक्षा की भावना जागृत हुई है। निम्रलिखित आंकड़े इस बात का प्रमाण है-   
हत्या के मामले वर्ष 2005 में 782, वर्ष 2006 में 873, वर्ष 2007 में 913, वर्ष 2008 में 921, वर्ष 2009 में 950, वर्ष 2010 में 1005, वर्ष 2011 में 1062, वर्ष 2012 में 989, वर्ष 2013 में 1031, वर्ष 2014 में 1106, वर्ष 2015 में 1001 और 31 जुलाई 2016 तक 621 मामले दर्ज हुए हैं। 
सदोष मानव वध के मामले वर्ष 2005 में 53, वर्ष 2006 में 57, वर्ष 2007 में 63, वर्ष 2008 में 89, वर्ष 2009 में 75, वर्ष 2010 में 60, वर्ष 2011 में 59, वर्ष 2012 में 68, वर्ष 2013 में 65, वर्ष 2014 में 65, वर्ष 2015 में 60 और 31 जुलाई 2016 तक 20 मामले दर्ज हुए हैं। 
हत्या के प्रयत्न के मामले वर्ष 2005 में 504, वर्ष 2006 में 583, वर्ष 2007 में 590, वर्ष 2008 में 625, वर्ष 2009 में 688, वर्ष 2010 में 835, वर्ष 2011 में 850, वर्ष 2012 में 907, वर्ष 2013 में 825, वर्ष 2014 में 778, वर्ष 2015 में 857 और 31 जुलाई 2016 तक 528 मामले दर्ज हुए हैं। 
चोट के मामले वर्ष 2005 में 4114, वर्ष 2006 में 4681, वर्ष 2007 में 4551, वर्ष 2008 में 4489, वर्ष 2009 में 3974, वर्ष 2010 में 3733, वर्ष 2011 में 3431, वर्ष 2012 में 3277, वर्ष 2013 में 3254, वर्ष 2014 में 3020, वर्ष 2015 में 2895 और 31 जुलाई 2016 तक 1549 मामले दर्ज हुए हैं। 
डकैती के मामले वर्ष 2005 में 88, वर्ष 2006 में 104, वर्ष 2007 में 137, वर्ष 2008 में 121, वर्ष 2009 में 153, वर्ष 2010 में 146, वर्ष 2011 में 168, वर्ष 2012 में 202, वर्ष 2013 में 159, वर्ष 2014 में 172, वर्ष 2015 में 200 और 31 जुलाई 2016 तक 119 मामले दर्ज हुए हैं। 
लूट के मामले वर्ष 2005 में 391, वर्ष 2006 में 409, वर्ष 2007 में 502, वर्ष 2008 में 555, वर्ष 2009 में 684, वर्ष 2010 में 732, वर्ष 2011 में 636, वर्ष 2012 में 714, वर्ष 2013 में 742, वर्ष 2014 में 803, वर्ष 2015 में 898 और 31 जुलाई 2016 तक 418 मामले दर्ज हुए हैं। 
घर में चोरी के मामले वर्ष 2005 में 3400, वर्ष 2006 में 3982, वर्ष 2007 में 4210, वर्ष 2008 में 4238, वर्ष 2009 में 4065, वर्ष 2010 में 4448, वर्ष 2011 में 4998, वर्ष 2012 में 5126, वर्ष 2013 में 6118, वर्ष 2014 में 6694, वर्ष 2015 में 6619 और 31 जुलाई 2016 तक 3923 मामले दर्ज हुए हैं। 
चोरी के मामले वर्ष 2005 में 8649, वर्ष 2006 में 10489, वर्ष 2007 में 11003, वर्ष 2008 में 12666, वर्ष 2009 में 12834, वर्ष 2010 में 16234, वर्ष 2011 में 17256, वर्ष 2012 में 17563, वर्ष 2013 में 18515, वर्ष 2014 में 20271, वर्ष 2015 में 20557 और 31 जुलाई 2016 तक 11943 मामले दर्ज हुए हैं। 
वाहन चोरी के मामले वर्ष 2005 में 5039, वर्ष 2006 में 6343, वर्ष 2007 में 6506, वर्ष 2008 में 7644, वर्ष 2009 में 8432, वर्ष 2010 में 11306, वर्ष 2011 में 11919, वर्ष 2012 में 12973, वर्ष 2013 में 13356, वर्ष 2014 में 14634, वर्ष 2015 में 14330 और 31 जुलाई 2016 तक 8638 मामले दर्ज हुए हैं। 
छीनाझपटी के मामले वर्ष 2005 में 461, वर्ष 2006 में 786, वर्ष 2007 में 752, वर्ष 2008 में 845, वर्ष 2009 में 905, वर्ष 2010 में 1007, वर्ष 2011 में 1205, वर्ष 2012 में 1136, वर्ष 2013 में 1159, वर्ष 2014 में 1166, वर्ष 2015 में 1314 और 31 जुलाई 2016 तक 925 मामले दर्ज हुए हैं। 
दहेज हत्या के मामले वर्ष 2005 में 211, वर्ष 2006 में 261, वर्ष 2007 में 269, वर्ष 2008 में 301, वर्ष 2009 में 280, वर्ष 2010 में 284, वर्ष 2011 में 255, वर्ष 2012 में 260, वर्ष 2013 में 265, वर्ष 2014 में 292, वर्ष 2015 में 242 और 31 जुलाई 2016 तक 154 मामले दर्ज हुए हैं। 
दहेज प्रताडऩा के मामले वर्ष 2005 में 2074, वर्ष 2006 में 2244, वर्ष 2007 में 2412, वर्ष 2008 में 2435, वर्ष 2009 में 2613, वर्ष 2010 में 2718, वर्ष 2011 में 2732, वर्ष 2012 में 3137, वर्ष 2013 में 3604, वर्ष 2014 में 3479, वर्ष 2015 में 3526 और 31 जुलाई 2016 तक 1804 मामले दर्ज हुए हैं।
बलात्कार के मामले वर्ष 2005 में 461, वर्ष 2006 में 607, वर्ष 2007 में 485, वर्ष 2008 में 634, वर्ष 2009 में 599, वर्ष 2010 में 717, वर्ष 2011 में 723, वर्ष 2012 में 590, वर्ष 2013 में 927, वर्ष 2014 में 1088, वर्ष 2015 में 1038 और 31 जुलाई 2016 तक 637 मामले दर्ज हुए हैं।
महिला अपहरण के मामले वर्ष 2005 में 355, वर्ष 2006 में 442, वर्ष 2007 में 597, वर्ष 2008 में 658, वर्ष 2009 में 457, वर्ष 2010 में 500, वर्ष 2011 में 472, वर्ष 2012 में 521, वर्ष 2013 में 1468, वर्ष 2014 में 1592, वर्ष 2015 में 1530 और 31 जुलाई 2016 तक 944 मामले दर्ज हुए हैं।
छेड़छाड़ के मामले वर्ष 2005 में 399, वर्ष 2006 में 508, वर्ष 2007 में 423, वर्ष 2008 में 451, वर्ष 2009 में 683, वर्ष 2010 में 743, वर्ष 2011 में 760, वर्ष 2012 में 875, वर्ष 2013 में 1532, वर्ष 2014 में 1688, वर्ष 2015 में 1926 और 31 जुलाई 2016 तक 1041 मामले दर्ज हुए हैं।
दलित महिलाओं से बलात्कार के मामले वर्ष 2005 में 18, वर्ष 2006 में 28, वर्ष 2007 में 21, वर्ष 2008 में 49, वर्ष 2009 में 40, वर्ष 2010 में 41, वर्ष 2011 में 48, वर्ष 2012 में 64, वर्ष 2013 में 142, वर्ष 2014 में 110, वर्ष 2015 में 115 और 31 जुलाई 2016 तक 63 मामले दर्ज हुए हैं।
दलित महिलाओं से छेड़छाड़ के मामले वर्ष 2005 में 10, वर्ष 2006 में 19, वर्ष 2007 में 19, वर्ष 2008 में 27, वर्ष 2009 में 24, वर्ष 2010 में 37, वर्ष 2011 में 33, वर्ष 2012 में 39, वर्ष 2013 में 119, वर्ष 2014 में 100, वर्ष 2015 में 110 और 31 जुलाई 2016 तक 71 मामले दर्ज हुए हैं।
उपरोक्त आंकड़ों से स्पष्ट है कि अपराध की वृद्धि दर वर्तमान सरकार के लगभग 22 महीने के कार्यकाल में इससे पहले के लगभग 10 वर्ष की तुलना में बहुत कम रही है। दबंगई की घटनाएं अब प्रदेश में कहीं भी देखने को नहीं मिलती हैं। वर्ष 2005 से 2014 तक कुल अपराधों में औसतन प्रतिवर्ष 11.2 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई जबकि वर्ष 2005 में ये वृद्धि दर मात्र 0.32 प्रतिशत थी तथा वर्ष 31 जुलाई 2016 तक यह दर (-)0.08 प्रतिशत रही है।
वर्ष 2005 से 2014 तक हत्या के माामलों में औसतन प्रतिवर्ष 4.2 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई जबकि 2015 में यह दर (-)10.59 प्रतिशत रही तथा 31 जुलाई तक यह दर 7.62 प्रतिशत रही। 
वर्ष 2005 से 2014 तक बलात्कार के मामलों में औसतन प्रतिवर्ष 13.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई जबकि 2015 में यह दर (-)4 प्रतिशत रही तथा 31 जुलाई तक यह दर 3.14 प्रतिशत रही। 
वर्ष 2005 से 2014 तक लूटपाट के मामलों में औसतन प्रतिवर्ष 10.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई जबकि 2015 में यह दर 10.7 प्रतिशत रही तथा 31 जुलाई 2015 तक यह दर (-)23 प्रतिशत रही।
वर्ष 2005 से 2014 तक डकैती के मामलों में औसतन प्रतिवर्ष 9.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई जबकि 2015 में यह दर 13.5 प्रतिशत रही तथा 31 जुलाई 2016 तक यह दर 
(-)11.8 प्रतिशत रही। 
वर्ष 2005 से 2014 तक चोरी के मामलों में औसतन प्रतिवर्ष 13.4 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई जबकि 2015 में यह दर 1.46 प्रतिशत रही तथा 31 जुलाई 2016 तक यह दर 1 प्रतिशत रही। 
वर्ष 2005 से 2014 तक छेडख़ानी के मामलों में औसतन प्रतिवर्ष 32.3 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई जबकि 2015 में यह दर 12.1 प्रतिशत रही तथा 31 जुलाई 2016 तक यह दर (-)8.2 प्रतिशत रही। । 
    मेवात के डिंगरहेड़ी गांव में 24 अगस्त, 2016 की रात बलात्कार, डकैती और हत्या की दुर्भाग्यपुर्ण घटना के संबंध में अभियोग संख्या 247 दिनांक 25.08.2016 धाराधीन 459/460/376 डी. भादसं, 6 पोक्सो एक्ट एवं 25/54/59 शस्त्र अधिनियम, थाना तावडू में दर्ज किया गया। अनुसंधान के दौरान धारा 396/397 तथा 302 भादसं लगाई गई है। पुलिस ने 4 अभियुक्तों को दिनांक 28.08.2016 को गिरफ्तार कर लिया है। पीडि़त परिवार के सदस्यों को 3 लाख रुपये की राहत राशि दे दी गई है और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जा चुकी है। घायलों के उपचार की समुचित व्यवस्था की गई है। मुकदमें में एसआईटी का गठन किय गया है जो इसका सघन अनुसंधान कर रही है। अनुसंधान पूर्व होने के उपरांत इस मुकदमें को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रायल कराने के लिए अनुशंसा की जाएगी। 
    पुन्हाना खंड के गांव नीमखेड़ा में एक दलित पीडि़त द्वारा अत्याचार से संबंधित मुकदमा नं 440 दिनांक 20.08.2016 धारा 147/149/506 भादसं व 3/33/89 एससी/एसटी एक्ट थाना पुन्हाना में दर्ज कराया गया है। घटना के बाद पीडि़त परिवार के कुछ सदस्य अपने परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के पास फिरोजपुर झिरका चले गए थे जो अब वापिस आ चुके हैं। कुछ शरारती लोगों ने इनके घर की वाटर सप्लाई लाइन को बाधित कर दिया था जिसे अब जुड़वा दिया गया है। अभियुक्तों के विरुद्ध विधि सम्मत कार्यवाही की जा रही है।
    जुलाई 2016 में गुडग़ांव में एक व्यापारी श्री संजीव जिंदल के पुत्र श्री अशोक जिंदल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके चार अभियुक्तों को दिनांक 15.08.2016 को तथा एक सह अभियुक्त को 18.08.2016 को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस प्रकार सभी अभियुक्त गिरफ्तार किये जा चुके हैं।
    सेक्टर-29 गुडग़ांव के थाना प्रबंधक पुलिस निरीक्षक सुरेंद्र सिंह फोगाट 30 जून 2016 को अपने निजी वाहन में सादे कपड़ों में जा रहे थे तो रास्ते में कुछ बदमाशों के साथ उनकी मुठभेड़ हुई थी। अकेला होने के कारण बदमाशों ने उसको काबू कर लिया था। इस संबंध में पुलिस ने मुकदमा नंबर 469 दिनांक 30.06.2016 थाना डीएलएफ सेक्टर-29 गुडग़ांव में दर्ज करके चार अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है। 
    इनेलो के पूर्व विधायक श्री सुभाष चौधरी के चचेरे भाई के घर में एक वारदात हुई थी। इस संबंध में पुलिस ने मुकदमा नंबर 685 दिनांक 17.08.2016 धाराधीन 460/302 आई.पी.सी. दर्ज करके 4 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया है और उनसे चोरी हुई कुछ सम्पत्ति भी बरामद की है। मुकदमा अनुसंधानाधीन है। 
    नेशनल थ्रो बाल खिलाड़ी महिला पुलिसकर्मियों द्वारा हरियाणा सशस्त्र पुलिस के कुछ कर्मचारियों/अधिकारी के विरुद्ध शिकायत दी गई थी जिस पर विधि अनुसार जांच कराकर विभागीय कार्रवाई प्रारंभ कर दी गई है। 
    रेवाड़ी जिले में अपराधियों द्वारा बी.एम.जी. माल रेवाड़ी के सामने गोली चलाई गई थी तथा अजीका गारमेन्ट के कर्मचारियों पर भी अपराधियों द्वारा गोलियां चलाई गई थी। दोनों ही मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है। गुडग़ांव में 21.08.2016 को चेन स्नैचिंग की घटना घटित हुई थी जो मुकदमा दर्ज किया जा चुका है तथा अपराधियों को गिरफ्तार करने के प्रयत्न किए जा रहे हैं।
    यद्यपि उपरोक्त घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं लेकिन पुलिस ने सभी घटनाओं केा अति गंभीरता से लेकर तत्परता के साथ तकरीबन सभी घटनाओं को हल कर लिया है और लगभग सभी में अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि शहरों और कस्बों में छेड़छाड़ और छीना झपटी की घटनाओं पर नियंत्रण लगाने में पुलिस सफल हो रही है और अपराधियों को तेजी से गिरफ्तार किया जा रहा है। अपराधियों को किसी भी शक्तिशाली पक्ष के संरक्षण के बारे में कोई स्थापित तथ्य मौजूद नहीं हैं, परंतु यदि इस प्रकार का कोई तथ्य सामने आया तो शीघ्रातिशीघ्र एवं कड़ी कार्यवाही की जाएगी। कानून एवं व्यवस्था की स्थिति नियंत्रण में है और सरकार अपने प्राथमिक कर्तव्य को भलिभांति निभा रही है।

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