Thursday, September 1, 2016

हरियाणा के हजारों बेरोजगार कला अध्यापक आर पार की लड़ाई के मूड़ में


चंडीगढ़,1 सितंबर,2016 (abtaknews.com) हरियाणा के बेरोजगार कला अध्यापकों का भविष्य अब
संकट में नजर आ रहा है। आज हरियाणा के अन्दर 70 फीसदी सरकारी व निजी
स्कूलों में कला अध्यापकों के पदों को खत्म कर दिया गया है। बाकी बचे
पदों पर भी सरकारी नियुक्ति नहीं कर पा रही। अगर यही हाल रहा तो आने वाले
समय में कला विषय का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। इस विषय के वर्चस्व को
बचाने व हरियाणा के हजारों आर्ट एंड क्राफ्ट डिप्लोमा धारकों के भविष्य
को देखते हुए बेरोजगार कला अध्यापक समिति के आहवान पर 11 सितंबर रविवार
को यहां नेहरू पार्क में प्रदेश स्तरीय बैठक बुलाई गई है। जिसकी
अध्यक्षता समिति के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप रानीला करेंगे। समिति के
उपाध्यक्ष संजय आदमपुर ने बताया कि हरियाणा के 20 हजार बेरोजगार कला
अध्यापकों के साथ अन्याय हो रहा है।  वे अपनी मांगों को पिछले 10 वर्षो
से सरकार के समक्ष रखते आ रहे हैं लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हो पाया
है। उन्होंने बताया कि वे कला अध्यापकों की नियुक्ति पुराने नियमों के
आधार पर करने, कला विषय को अनिवार्य विषय करने की मांग कर रहे हैं। लेकिन
पिछली सरकार ने इस डिप्लोमा को समाप्त कर दिया है। उन्होंने नियमों का
हवाला देते हुए बताया कि 31 अगस्त 2009 को प्रकाशित एनसीटीई रेगुलेशन
2007 का जिक्र किया गया है। उसमें पेज नं. 116 पर साफ तौर पर डिप्लोमा इन
आर्ट एजूकेशन के लिए शैक्षणिक योग्यता सीनियर सेकेंडरी अथवा 12 वीं कक्षा
डिप्लोमा को ही आधार माना गया है। अगर अब की योग्यता की बात की जाए तो
हरियाणा के सभी कला अध्यापक उस योग्यता व मापदंड के अनुरूप ही नहीं है।
बल्कि हरियाणा के हजारों कला अध्यापकों का डिप्लोमा मात्र एक कागज का
टुकडा बनकर रह गया है

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