Tuesday, September 27, 2016

फरीदाबाद के वीरपाल शर्मा, रूपम शर्मा, एवं दिव्यांशु ने जीता इन्फी मेकर अवार्ड





फरीदाबाद-27 सितंबर 2016(abtaknews.com): इन्फोसिस कंसल्टिंग, टेक्नाॅलाॅजी, आउटसोर्सिंग एवं नेक्स्ट-जनरेशन सर्विसेस में वैश्विक अग्रणी कंपनी, ने आज भारत में पहले इन्फी मेकर अवार्ड्स के विजेताओं की घोषणा की है। इन्फीमेकर अवार्ड मेक इन इंडिया के सिद्धांत को बढ़ावा देने के लिए इन्फोसिस की प्रतिबद्धता के प्रमाण हैं। ये पुरस्कार उन लोगों को सम्मानित करते हैं, जो रियल वल्र्ड की समस्याओं के लिए रचनात्मक समाधान विकसित करने में रुचि रखते हैं या जिनमें जिंदगी को आसान बनाने के लिए टेक्नाॅलाॅजी का प्रयोग करने की योग्यता हो। ये अवार्ड्स सबसे पहले इन्फोसिस फाउंडेशन, यूएसए के द्वारा अमेरिका में प्रेसिडेंट ओबामा के नेशन आॅफ मेकर्स अभियान की मदद से जून, 2015 में लाॅन्च किए गए।

श्री प्रवीण राव, चीफ आॅपरेटिंग आॅफिसर, इन्फोसिस ने कहा, ‘‘भारत में इन्फी मेकर अवार्ड्स का लक्ष्य सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को सम्मानित करना और अगली पीढ़ी के विचारकों की रचनात्मकता और कल्पनाशक्ति का विकास करना है। हमारा मानना है कि ये अवार्ड्स मेक इन इंडिया की भावना और रचनात्मकता के साथ उत्कृष्टता को बढ़ावा देंगे। इन अवार्ड्स के द्वारा हमारा लक्ष्य अग्रगामी सोच वाले निर्माताओं के विकास का परिवेशन निर्मित करना है। इन्फोसिस, भारत में विभिन्न समुदायों और संस्थानों में इस तरह के निर्माताओं को पुरस्कृत करके सशक्त बनाना चाहती है।’’

विजेताओं को उनकी उपलब्धि पर बधाई देते हुए, वंदना सिक्का, चेयरपर्सन, इन्फोसिस फाउंडेशन, यूएसए ने कहा, ‘‘इन्फी मेकर अवार्ड्स प्रोग्राम निर्माण की भावना को बढ़ावा देते है, जो हम सभी में निहित है। ये पुरस्कार पूरे भारत में उन निर्माताओं की रचनात्मक उत्कृष्टता को पुरस्कृत करते हैं, जिनके विचारों एवं समाधानों में आज के विश्व की विभिन्न समस्याओं का समाधान करने की सामथ्र्य है। हमारा मानना है कि यह अभियान भारत में निर्माता समुदाय में विचारशीलता को जन्म देगा, उत्सुकता को बढ़ावा देगा और रचनात्मकता की भावना का विकास करेगा। यूएस में इस अवार्ड प्रोग्राम के सफल होने के बाद भारत में इन्फी मेकर अवार्ड विशाल वैश्विक समुदाय को अपना योगदान देने एवं अगली पीढ़ी के निर्माताओं को प्रेरित करने की हमारी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करता है। भविष्य को हमेशा उन लोगों ने आकार दिया है, जो निर्माण करते हैं।’’

भारत के पहले संस्करण में 280 से अधिक प्रविष्टियों एवं 2500 से अधिक नामांकनों में से 20 विजेताओं को चुना गया। विजेताओं का चयन प्रतिष्ठित जजों द्वारा किया गया, जिनमें टेक्नाॅलाॅजी, एकेडेमिक एवं बिज़नेस समुदाय की गणमान्य हस्तियां शामिल थीं। ज्यूरी में सुश्री किरन मजूमदार शाॅ, चेयरपर्सन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर, बायोकाॅन; सुश्री रमा बीजापुरकर, लेखिका; श्री मोहनदास पाई, चेयरमैन, आरिन कैपिटल पार्टनर्स एवं श्री प्रवीण राव, चीफ आॅपरेटिंग आॅफिसर, इन्फोसिस ने विजेता प्रविष्टियों का मूल्यांकन किया, जो रियल वल्र्ड की समस्याओं पर आधारित थीं। इनमें तकनीक का रचनात्मक प्रयोग, विचारों की मौलिकता और क्वालिटी प्रेजेन्टेशन जैसी विशेषताएं थीं।

इन्फी मेकर अवार्ड्स इंडिया ‘मेकिंग’ द्वारा रचनात्मकता के विकास का परिवेश संभव बनाता है, जिससे भारत को अविष्कारकों एवं उद्यमियों के विशाल वैश्विक समुदाय को बड़ा योगदान देने में मदद मिलेगी। 20 विजेता विचारों में से प्रत्येक को 5 लाख रूपये का पुरस्कार, एक ट्राॅफी और एक सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।

प्रमुख झलकियां
विभिन्न श्रेणियों: स्वास्थ्य, ऊर्जा, शिक्षा, ध्वनि एवं संगीत, सामाजिक बदलाव के समाधान, रोबोटिक्स, कला एवं डिजाईन, कृत्रिम योग्यता, इलेक्ट्राॅनिक्स एवं अन्य श्रेणियां, में 20 विजेताओं को चुना गया
पहले इन्फी मेकर अवार्ड्स, इंडिया के विजेताओं की सूची निम्नलिखित है:

व  सामाजिक बदलाव के समाधान
व स्वास्थ्यः

असिस्टयू - कानों से कम सुनने वाले लोगों से बात करने के लिए कम्युनिकेटिव ग्लोव साॅल्युशन - सौरभ अलगुंडगी, संदीप पाटिल एवं श्रेया गुदासलामनी।
सायकल रिक्शा के पेडल चलाना आसान और सुरक्षित बनाने के लिए रिजनरेटिव ब्रेक- संजीव अर्जुन गौड़।
क्षैतिज एवं ऊध्र्वाधर दिशा में चलने के लिए मल्टी-फंक्शनल एलिवेटर- वुप्परी कल्याणी
लाईनमैन की सुरक्षा एवं संचार सुनिश्चित करने के लिए आरएएसएस डिवाईस- इलमपोथिगई के., विग्नेश वी., आनंद गोपी एवं इब्राहिम अहमद हसन अवद।
मछुआरों के लिए समुद्री सीमा का वार्निंग सिस्टम- अरविंद एस., बालाजी वी. एवं अरविंद जी.।
सेल्फी इनोवेटर्स- कचरे की मात्रा मापने के लिए पब्लिक ओवर डंप लिमिटर सेंसर - अरुण कुमार एस. एवं विष्णुप्रिया एस.।
भीड़ भरे इलाकों में पार्किंग आसान बनाने के लिए इन्विजिबल बस बे- चेतन प्रसाद
शोर- पानी के संरक्षण के लिए शाॅवर का अधिक स्मार्ट तरीका- आकाश गोयल।
टाईकीजुनो- पंक्चर खुद तलाशने और ठीक करने की बीपीपीसी टेक्नाॅलाॅजी- समीर पांडा, डाॅ. के. एन. पांडा, स्मृतिपर्ण सत्पति एवं जयंत प्रधान।

व    स्वास्थ्यः

§          लाईट फाईडेलिटी (लाई-फाई) का प्रयोग करके हार्टबीट माॅनिटरिंग सिस्टम - दीपिका गिरी, वी. कृष्ण कुमार, कविता सौन्दराराजन एवं एल. जमुना।
§          उन गर्भवती ग्रामीण महिलाओं, जिन्हें स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं हैं, के लिए क्लिनिक-इन-बाॅक्स- शांतनु पाठक एवं आदित्य कुलकर्णी।
§          स्ट्रोक के मरीजों और फिजियोथेरेपी की जरूरतों के लिए आर्डुअस थेरेपिस्ट- सी. काॅर्निलियस दुरई, टी. डेविड थेवाराम एवं एस. साईराम।
§          आॅस्टिक लोगों को संचार करने में मदद करने के लिए वीटाॅक साॅल्यूशन- अभिनव शेखर वशिष्ठ।
§          सीटएबी- काम करने के सही पोस्चर के बारे में सावधान करने के लिए पोस्चर प्राॅक्टर- डाॅ. लोवी राज गुप्ता, कुणाल पांचाल, येरा प्रसांति, सतीश रेड्डी एवं विशाखा चैधरी।
§          फिजियोथेरेपी सही दिशा में चल रही है, यह सुनिश्चत करने के लिए फिजियो- वीरपाल शर्मा, दिव्यांशु वाष्र्णेय एवं रूपम शर्मा ।

व    ऊर्जाः
§          लो काॅस्ट विंड टर्बाईन- कृष्णानंद वेंकटसुब्रमण्यिन एवं सेंथिलवेल एस.

व    कृत्रिम योग्यताः
§  दो पहिया वाहनों के लिए ह्यूमन सेफ्टी सिस्टम- कन्नाबीरन एस., गोकुल श्रीनाथ वी. एवं बूबालन बी।

व   इलेक्ट्राॅनिक्स:
§  पानी का ओवरफ्लो रोकने के लिए वेदरप्रूफ लिक्विड लेवल स्विच एवं इंडीकेटर- नागार्जुन पटूरी।

व      अन्य:  
§  फर्मेडिसियस - किसी खेत के लिये सिंचाई की आवश्यकता जानने हेतु और ट्युबवेल से पानी की आपूर्ति के लिये कंट्रोल मैकेनिज्म का समाधान- सुभाजीत बिस्वास, नितिन राजू डी. और नितेश कुमार
§  दृष्टिबाधितों के लिये वाॅकिंग स्टीक - अभिषेक मतलोटिया

loading...
SHARE THIS

0 comments: