Monday, September 19, 2016

प्राकृतिक चिकित्सा से वायरल,डेंगू एवं चिकनगुनिया का ईलाज संभव;- डॉ अमर देव शास्त्री

आखिर क्या होती है प्राकृतिक चिकित्सा, इस विडियो को देंखें --
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फरीदाबाद-19 सितंबर(abtaknews.com ) दिल्ली एनसीआर में फैले हुए चिकनगुनिया के डंक का ईलाज सराय ख्वजा के पास पहाडी पर बने हुए गुरूकुल इंद्रप्रस्थ में खोज लिया गया है जहां योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है जिसमें प्राकृतिक क्रियाओं के माध्यम से विभिन्न असाध्य रोगों का उपचार किया जा रहा है। इतना ही नहीं गुरूकुल में बिन दवाओं के चिकनगुनियां जैसी भयंकर बिमारी का ईलाज भी प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा रहा है। वहीं मुख्य प्रशिक्षक डॉक्टर अमर देव शास्त्री द्वारा गुरूकुल के छात्रों को जल नेती व कुंजल क्रिया, स्टीम बॉथ, मिट्टी लेप  के माध्यम से  डिस्क प्रोबलम, अलसर, टीबी और चर्म रोग जैसी बीमारियों को दूर करने के तरीके बताए जा रहे हैं। 

दिल्ल से सटे हुए कई शहरों में अपना प्रकोप बरपाने वाली चिकनगुनियां नामक बिमारी ने हाहाकार मचा दिया है, इस विदेशी वायरल ने कई दर्जनों मासूमों की जान भी ले ली है, डाक्टर ईलाज के नाम पर हाथ खडे कर रहे हैं और आराम करने के साथ बुखार उतरने की सलाह दे रहे हैं मगर अभी तक इस बिमारी का कोई ठोस ईलाज नहीं कर पा रहा है,, लेकिन प्राकृतिक चिकित्सकों ने दावा किया है कि इस बिमारी का ईलाज प्राकतिक चिकित्सा से हो सकता है। जिसके लिये उन्होंने सराय ख्वाजा के निकट अरावली पर्वत श्रंगला में बसे गुरूकुल इंद्रप्रस्थ में सेहत रक्षा डॉट कॉम का स्वास्थ्य शिविर लगाया है। जिसमें चिकनगुनियां ही नहीं अन्य बिमारियों का भी प्राकृतिक चिकित्सा से ईलाज किया जा रहा है।

शिविर के मुख्य संचालक डॉ अमर देव शास्त्री ने बताया कि योग एवं प्राकृतिक चिकिस्ता के माध्यम से असाध्य रोगों का उपचार इस शिविर में किया जा रहा है। जल नेती व कुंजल क्रिया, स्टीम बॉथ, मिट्टी लेप के माध्यम से  डिस्क प्रोबलम, अलसर, टीबी और चर्म रोग जैसी बिमारियों को भी दूर किया जा रहा है।डॉ शास्त्री ने बताया की प्राकृतिक चिकित्सा से डेंगू, वायरल और चिकनगुनिया जैसी बीमारियो का ईलाज किया जा रहा है। इस शिविर में हरियाणा प्रदेश के दूर दराज के जिलो से एवम दिल्ली एनसीआर से लोग प्राकृतिक चिकित्सा लेने के लिए आ रहे है। शिविर का समय सुबह 6 बजे से 8 बजे तक का है इसका समापन 22 सितंबर को होगा। वहीं गुरूकुल में शिक्षा ग्रहण कर रहे मनीष और प्रकाश झा विद्यार्थियों ने बताया कि उन्हें गुरूकुल में प्राचीन शिक्षा के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है, अपने प्रचीनकाल के शास्त्रों के बारे में भी बताया जाता है। वहीं उन्हें स्वस्थ्य रहने के लिये कई प्रकार के प्राकृतिक चिकित्सा के तरीके भी बताये जाते हैं जिनसे उनकी सभी बिमारियां दूर हो जाती है।

गुरूकुल इंद्रप्रस्थ फरीदाबाद के आचार्य ऋषिपाल ने बताया कि इस अरावली की पहाडी पर सन 1916 में ये गुरूकुल स्थापित किया गया  था जहां बच्चों को वैदिक पद्धति की शिक्षा के साथ साथ आधुनिक शिक्षा भी दी जाती है। भारतीय संस्कृति के साथ आधुनिक शिक्षा पद्धति की शिक्षा के साथ गुरूकुल बच्चों का सर्वांगीण विकास कर रहा है। गुरूकुल में करीब 9 प्रदेशों के लगभग 114 बच्चे आवासीय व्यवस्था के साथ शिक्षा ग्रहण कर रहे है।कम सख्यां के बारे में बताते हुए आचार्य ने कहा कि आधुनिक युग की ओर बच्चों और उनके परिजनों का ज्यादा ध्यान है उनके पास तो सिर्फ बिगडैल बच्चे ही अधिक आते हैं जिन्हें मां बाप संभाल नहीं पाते। इतना ही नहीं आचार्य ने आधुनिक शिक्षा पर सवाल उठाते हुए कहा कि आधुनिक शिक्ष देश को निचले स्तर पर लेकर जा रही है जिसकारण देश में अपराध,चरित्रहीनता पैदा हो रही है। इस वक्त बच्चों को वैदिक शिक्षा की बेहद जरूरत है इसलिये वे प्रदेश एवं देश की सरकार से मांग करते हैं कि अगर देश को बचाना है तो देश में प्राचीन भारतीय संस्कृति वाली शिक्षा पद्धति को स्कूल पाठयक्रम में शामिल करना होगा।
इस शिविर में सहयोग करने में गुरूकुल इंद्रप्रस्थ के संचालक आचार्य ऋषिपाल,बाबा रामकेवल, डॉ अमर देव शास्त्री, नीरज त्यागी, तरूण त्यागी, पंकज सिंह, लोकेश बैंसला और रामसेवक मुख्यरूप से उपस्थित रहे।
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