Sunday, September 11, 2016

मीठा पानी बांटकर दर्द को किया बयां, कश्मीरी पंडितों ने लगाई छबीली



बल्लभगढ़(abtaknews.com) मशहूर गायक किशोर कुमार का गीत 'कोई लौटा दे मेरे बीते हुए दिनÓ कश्मीरी पंडितों के लिए किसी दर्द से कम नहीं है। इसलिए अलग-अलग कॉलोनियों, सेक्टरों में 12 सौ से ज्यादा विस्थापितों की भांति रह रहे कश्मीरी परिवारों अपने दर्द को बयां करने के लिए नायाब तरीके इजाद करते है। रविवार को सेक्टर तीन में कश्मीरी पंडितों ने मीठा पानी की छलीबी लगाकर लोगों केा अपनी व्यथा बताई और अपने दर्द को हल्का किया। इस दौरान उन्होंने 27 वर्ष पूर्व 14 सिंतबर के दिन घाटी में पंडितों के शीर्ष नेता टीका लाल टपलू की कट्टर अलगाववादियों द्वारा हत्या के संबंध में पर्चे भी बांटे। कार्यक्रम में कश्मीरी पंडितों से संबंधित संस्था शारीका सेवक संघ, कश्मीरी वेलफेयर एसोसिएशन और पनुन कश्मीर से जुड़े लोगों ने सहयोग किया। पनुन कश्मीर के संयोजक डिगम्बर रैना ने बताया कि उनका समुदाय 14 सितंबर को काला दिवस के रूप में याद रखता है। वर्ष 1989 में इसी दिन से अलगाववादियों ने प्रदेश में कश्मीरी पंडितों की हत्या का सिलसिला शुरू किया था। इसलिए हम इस दिन को काला दिन के रूप में हमेशा याद रखना चाहते हैं। हम तब तक चैन से नहीं बैठ सकते जब तक कश्मीरी पंडितों के हत्यारों को सजा और हमें न्याय नहीं मिल जाता। शरीरा सेवक संघ के एचआर कौल ने बताया कि इसी दिन से अलगाववादियों ने घाटी में कश्मीरी पंडितों को चुन चुन कर मारना शुरू किया था। इस वजह से हजारों की संख्या में पंडितों को अपना घरबार छोड़कर भागना पड़ा था। हम एक बार फिर से कश्मीर घाटी में पंडितों के लिए अलग प्रदेश की मांग करते हैं। शहीदी दिवस के मौके पर उन्होंने संकल्प लिया कि विस्थापित परिवार तब तक संघर्ष जारी रखेंगे जब तक उन्हें उनका पूरा हक नहीं मिल जाता। इस मौके पर संजय कौल, धनेश रैना, बंसीलाल, पार्थ पंडिता, कृष्णा कौल, तेजकिशन, अमित पंडिता और डिगंबर रैना सहित अनेक कश्मीरी पंडित मौजूद थे। 

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