Tuesday, September 13, 2016

हरियाणा में कैदियों को जेल में दिया जा रहा है रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण



चण्डीगढ़, 13 सितम्बर(abtaknews.com ) हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी), जेल श्री यशपाल सिंघल ने कहा कि इस समय प्रदेश की जेलों में लगभग 19 हजार कैदी है। जबकि इन जेलों में 18094 कैदियों को रखने की क्षमता है। प्रदेश के पानीपत तथा रेवाड़ी जिला में नई जेल भवन बनाया जा रहा है। इन दोनों कारागारों में एक-एक हजार कैदियों को रखने की क्षमता रहेगी।
वे आज जींद जिला के कारागार में कैदियों के लिए जेल में मोटर साईकिल रिपेयर सैंटर का शुभारम्भ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जेलों में सजा काट रहे कैदियों को विभिन्न प्रकार के हुनर का प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि सजा पूरी होने के बाद ये लोग समाज की मूलधारा में शामिल होकर अपने जीवन यापन के लिए स्वरोजगार चला सके। डीजीपी श्री यशपाल सिंघल आज जींद जिला की कारागार का दौरा कर ं कैदियों की समस्याएं सुन रहे थे।
डीजीपी ने कहा कि सभी जेलों में योगा और सांय कालीन प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाने लगी है। उन्होंने कहा कि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे है। योग के कारण कैदियों का स्वास्थय ठीक रहता है। इस कारण कैदियों की ओपीडी में भी कमी आई है। उन्होंने कहा कि योग के कारण कैदी मानसिक रूप से हताश नहीं रहते उन्हें अपनी निराशा से उबरने का मौका योग से मिलता है। सांय कालीन प्रार्थना सभाओं में महान पुरूषों के उपदेश सुनाए जाते हैं। इस प्रकार उन्हें समाज की मूलधारा में शामिल होने की प्रेरणा मिलती हैं। 
डीजीपी जेल श्री यशपाल सिंघल ने यहां जेल के महिला वार्ड में महिला कैदियों को जिन्होंने  जेल में रोजगारोन्मुखी व्यवसायों का प्रशिक्षण प्राप्त किया है, उनमें प्रमाण पत्र वितरित किए। उन्होंने महिलाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपनी सजा के दौरान ऐसे हुनर या व्यवसाय सीखें जो सजा पूरी होने के बाद अपने घर पर आसानी से चलाए जा सकते हैं। यहां टेलरिंग एण्ड कटिंग के प्रमाण पत्र वितरित करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक ऐसा काम है, जो प्रत्येक जन मानस से जुड़ा है और घर में इस काम को किया जा सकता है। उन्होंने इस विंग में महिलाओं द्वारा तैयार किए गए टैडी बीयर या अन्य डैकोरेशन की चीजों को देखा और महिला कैदियों को इस विधा में पारंगत होने के लिए कहा। गौरतलब है कि महिलाओं को टेलरिंग एंड कटिंग के कार्य का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा अन्य खिलौने इत्यादि बनाने की कला भी जेल में सिखाई जा रही है। 
डीजीपी ने कहा कि सभी जेलों में एसी रिपेयर तथा मोटर साईकिल रिपेयर के कार्य का प्रशिक्षण कैदियों को देने का प्रावधान है। आज के इस युग में एसी की मुरम्मत का कार्य भी अच्छे तरीके से चल सकता है। इसी प्रकार प्रत्येक घर में मोटर साईकिल है और इस प्रशिक्षण के दौरान कैदियों को मोटर साईकिल की रिपेयर के कार्य में निपुण किया जाएगा। ऐसे प्रशिक्षण प्राप्त सजा पूरी कर चुके कैदियों को समाज की मूलधारा में शामिल करने के लिए विभिन्न बैंकों से लोन भी दिलवाने के लिए प्रयास किए जाएगें। उन्होंने जेल परिसर में कैदियों से रूबरू होते हुए कहा कि वे किसी भी अपराध के कारण में जेल में आए हैं, यहां उन्हें जीवनोपयोगी सेवाओं से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। यह जेल प्रशासन का प्राथमिक कार्य होगा। उन्होंने कैदियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे किसी भी जुर्म में यहां आए है उसकी सजा काटने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहेगें तो मानसिक रूप से ठीक रहेगें और जेल में रहते हुए जिंदगी को अपने अनुरूप ढाल लेगें तो उनका जीवन सुखद होगा। उन्होंने कहा कि जेल प्रशासन का काम कैदियों को सही तरीके से रहने की व्यवस्था करना है।  सजा का निर्धारण जेल प्रशासन द्वारा नहीं किया जाता । यह कार्य न्यायपालिका का है। जेलों में सजा काट रहे लोगों को समाज की मूलधारा में शामिल करने के लिए उन्हें हुनर से जोडऩा प्राथमिकताओं में शामिल हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जिन जेलों में क्षमता से अधिक कैदी है उन्हें अन्य जिला की जेलों में शिफट कर दिया जाता हैं। 
डीजीपी ने कैदियों की समस्याएं भी सुनी। एक 60 वर्षीय महिला कैदी ने कहा कि वह निर्दोष है। उसे बेवजह जेल में डाला गया । इस पर डीजीपी ने कहा कि जेल प्रशासन का कार्य कैदियों को बेहतर सुविधाएं जिसमें रहने , खाने-पीने इत्यादि की व्यवस्था शामिल है,देना प्राथमिकता है। वृद्धा ने कहा कि उसे लकवा की बीमारी है ,इस पर डीजीपी ने कहा कि बोर्ड के सम्मुख वृद्धा मामला रखा जाए। 
जिला कारागार अधीक्षक हरीश कुमार रंगा ने डीजीपी का स्वागत करते हुए कहा कि जेल में योगा की क्लासें चलाई जा रही हैं। यहां कैदियों को मानसिक तनाव से दूर रखने के लिए उन्हें म्यूजिक की ओर आकृष्ट किया जाता है। उन्हें वादय यंत्रों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। जेल में इच्छुक कैदियों को हेयर डै्रसर/बारबर का कार्य भी सिखाया जाता है। 

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