Thursday, September 15, 2016

भाषा किसी भी राष्‍ट्र की सामाजिक और सांस्‍कृतिक धरोहर की संवाहक;-राजनाथ सिंह



भाषा किसी भी राष्‍ट्र की सामाजिक और सांस्‍कृतिक धरोहर की संवाहक होती है और साथ ही संपूर्ण राष्‍ट्र की एकता और अखंडता की एक महत्‍वपूर्ण कड़ी भी होती है। स्‍व-भाषा के बिना स्‍वराज का बोध कदापि नहीं हो सकता। राष्‍ट्रीयता, भारतीयता और एकता हिंदी का मूल स्‍वर है और राजभाषा हिंदी सरकार एवं संपूर्ण देश की आम जनता के बीच में संवाद की भाषा होकर अपनी सार्थक भूमिका निभा रही है। इस प्रकार हिंदी को राष्‍ट्रीय स्‍वाभिमान का अंग एवं प्रेरणा स्रोत के रूप में सर्वाधिक उपयुक्‍त समझते हुए भारतीय संविधान सभा द्वारा 14 सितंबर, 1949 को हिंदी को भारत-संघ की राजभाषा के रूप में अंगीकार किया गया। इसी अनुक्रम में 26 जनवरी, 1950 में लागू भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 343(1) के अनुसार यह व्यवस्था की गई कि संघ सरकार की राजभाषा हिंदी होगी एवं इसकी लिपि देवनागरी होगी।
विश्व में सर्वप्रथम सभ्‍यता एवं संस्‍कृति का उद्गम भारत भूमि पर ही हुआ। जिस भारत भूमि में योग, सांख्‍य-दर्शन, दशमलव-प्रणाली, ज्‍योतिष-विज्ञान, ग्रह-नक्षत्रों की दूरी और काल की गणना जैसे ज्ञान से परिपूर्ण विषयों पर उत्‍कृष्‍ट साहित्‍य का सृजन हुआ हो, उस देश की भाषाओं की जड़ें कितनी गहरी, समुन्नत, समृद्ध और वैज्ञानिक हो सकती हैं, इसका अनुमान लगाया जा सकता है। भारतीय भाषाओं की इन्‍हीं विशेषताओं को ध्‍यान में रखते हुए संविधान के अनुच्‍छेद 351 के अनुसार संघ सरकार को यह दायित्‍व सौंपा गया कि वह हिंदी भाषा का प्रसार और उसका विकास करे ताकि हिंदी भारत की सामासिक-संस्‍कृति के सभी तत्‍वों  की अभिव्‍यक्‍ति का माध्‍यम बन सके।आज की उदारीकृत अर्थव्यवस्था के युग में देश को अशिक्षा, बेरोजगारी और गरीबी से उबारने के लिए आम जनता को सूचना प्रौद्योगिकी, पर्यावरण-संरक्षण, कृषि, अभियांत्रिकी, स्वास्थ्य सेवाओं जैसे अनेक क्षेत्रों  में राजभाषा हिंदी के माध्यम से शिक्षित करने की नितांत आवश्यकता है। लेखक और प्रकाशक राजभाषा हिंदी के माध्यम से स्वदेशी विज्ञान की समृद्ध परंपरा को सभी भारतीयों तक पहुंचाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं
भारत सरकार के सभी कार्यालयों के कामकाज में सरल एवं सहज हिंदी का प्रयोग किया जाए ताकि यह सभी के लिए बोधगम्य हो तथा इसका प्रयोग बहु-आयामी हो सके। यहाँ यह याद रखना आवश्‍यक है कि संघ की राजभाषा नीति का मुख्‍य उद्देश्‍य मूल रूप से राजकीय-कार्य हिंदी में करना है। कार्यालयीन कार्य हिंदी में किए जाने से ही राजभाषा हिंदी का प्रयोग बढ़ेगा तथा राजभाषा नीति का सही मायनों में कार्यान्‍वयन संभव होगा। इस दिशा में अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने के लिए दो महत्‍वपूर्ण कदम उठाए जाने आवश्‍यक हैं। पहला, मैं विशेष रूप से केंद्र सरकार में कार्यरत सभी वरिष्‍ठ अधिकारियों से आग्रह करता हूं कि वे स्‍वयं अपना रोज़मर्रा का सरकारी कामकाज हिंदी में करें ताकि अन्‍य सभी कार्मिकों को भी ऐसा करने की प्रेरणा मिले। दूसरा, सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए मैं केंद्र सरकार के सभी प्रशिक्षण संस्‍थानों के प्रमुखों से अनुरोध करता हूं कि वे राजभाषा विभाग द्वारा ’,  और  क्षेत्रों के लिए निर्धारित लक्ष्‍यों के अनुरूप अपने प्रशिक्षण कार्यक्रम हिंदी माध्‍यम में ही आयोजित करें। हमें इस प्रयोजनार्थ व्‍यावहारिक कार्य-योजना बनाकर गंभीर प्रयास करने की आवश्‍यकता ह
मैं यह भी अपील करता हूं कि राजभाषा विभाग को भेजी जाने वाली हिंदी की तिमाही प्रगति रिपोर्टों व अन्‍य अपेक्षित रिपोर्टों में वास्तविक और तथ्यपरक आंकड़े एवं सूचनाएं ही दी जाएं। संघ की राजभाषा नीति का आधार सद्भावना, प्रेरणा और प्रोत्साहन है किंतु संबंधित अनुदेशों का अनुपालन उसी प्रकार दृढ़तापूर्वक किया जाना चाहिए जिस प्रकार अन्य सरकारी अनुदेशों का अनुपालन किया जाता है। आइए ! हिंदी दिवस के इस शुभ अवसर पर हम यह दृढ़ संकल्प लें कि हम सभी पूर्ण उत्साह, लगन और गर्व के साथ अपना अधिकाधिक कार्य राजभाषा हिंदी में करेंगे। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारे सामूहिक, सार्थक एवं अथक प्रयासों से हम अपना लक्ष्य अवश्य ही प्राप्त करेंगे और देश में हिंदी के प्रचार-प्रसार एवं प्रयोग को एक नया आयाम देंगे ।

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