Saturday, September 3, 2016

विश्व में नारियल उत्पादन और उत्पादकता में भारत अग्रणी देश है;- राधा मोहन


विश्व नारियल दिवस एवं राष्ट्रीय पुरस्कार वितरण समारोह के अवसर पर भुवनेश्वर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा की विश्व में नारियल उत्पादन और उत्पादकता में भारत अग्रणी देश है। हमारा वार्षिक नारियल उत्पादन 19.8 लाख हेक्टेयर से 2044 करोड नारियल है और उत्पादकता प्रति हेक्टेयर 10345 नारियल है। देश के सकल घरेलू उत्पाद में नारियल का योगदान करीब 20000 करोड़ रुपए है। वर्ष 2015-16 में हमारे देश से 1450 करोड रुपये मूल्य के नारियल उत्पादों का निर्यात किया गया है। श्री सिंह ने यह भी बताया कि हमारे देश में एक करोड़ से अधिक लोग अपनी जीविका चलाने के लिए इस फसल पर निर्भर करते है। 

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने जानकारी दी कि ओडिशा राज्य को बागवानी मिशन के कार्यावन्यन हेतु वर्ष 2015-16 में 54.45 करोड़ एवं 2016-17 में अबतक 26.83 करोड़ राशि विमुक्त की गई है। इस वर्ष राज्य को केन्द्रीय हिस्से के रूप में 49.91 करोड़ की राशि प्राप्त होनी है। पिछले वर्ष राज्य 4.15 करोड़ रूपये खर्च नहीं कर पाया था। श्री सिंह ने आशा जताई कि इस वर्ष केन्द्र से प्राप्त सम्पूर्ण राशि ओडिशा के बागवानी मिशन पर खर्च किया जायेगा। यह भी कहा कि मिशन के बजट का लगभग एक चौथाई हिस्सा फसलोपरांत प्रबन्धन अवसंरचना, खासकर कोल्ड सप्लाई चेन निर्माण करने हेतु एवं किसान उत्पादकों को सीधे बाजार से जोड़ने के लिए खर्च किया जाना चाहिए । 

पिछले 2 वर्षों में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने ओडिशा राज्य के बागवानी विकास हेतु रू. 6.50 करोड़ की सहायता प्रदान की है जिसमें ग्रीन हाउस, पोली हाउस, कोल्डर स्टो रेज जैसी महत्वपपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। ओडिशा के गुंजम एवं कोरापुट जिले में काजू संवर्धन की अनेक इकाईयां स्था पित की गई हैं। इसके साथ ही, गुणवत्तं पौध बनाने हेतु आधुनिक नर्सरी के विकास के लिए भी सहायता प्रदान की गई है। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड ने हाल ही में एक अखिल भारतीय बागवानी संगम (हार्टि संगम) का आयोजन ओडिशा राज्य के बरगढ़ जिले में किया था जिसमें देश के विभिन्नट राज्यों से राष्ट्रीयय बागवानी बोर्ड से सहायता प्राप्तह किसान अपने गुणवत्ति उत्पाीदों के साथ शामिल हुए थे और लाखों किसानों ने इस हार्टि संगम क्षेत्र का भ्रमण किया तथा कृषि प्रौद्योगिकी एवं विभिन्न सरकारी योजनाओं में अपनी रूचि दिखाई थी। 

श्री सिंह ने कहा कि नारियल ओडीशा राज्य की एक प्रमुख फसल है और यहां 50679 हेक्टेयर क्षेत्र में नारियल की खेती की जाती है और नारियल का उत्पादन 32.4 करोड है। राज्य में प्रति हेक्टेयर 6404 नारियल का उत्पादन हो रहा है। ओडिशा के कुल नारियल उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक राज्य के पांच जिलों याने पुरी, गंजम. क्ट्टक, नयाग्ढ और खुर्दा में होता है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री ने बताया कि नारियल उद्योग में जो उपलब्धि देश में हासिल हुई है उसके पीछे नारियल विकास बोर्ड का बहुत बड़ा योगदान है। नारियल के मूल्यवर्धन (value addition)से ही नारियल किसानों को समृद्धि की ओर ले जाया जा सकता है। इसलिए बोर्ड के नारियल प्रौद्योगिकी मिशन योजना के अधीन भारत में अभी तक 402 नारियल प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना हुई है और इन इकाइयों में प्रति वर्ष 242 करोड नारियल का प्रसंस्करण किया जाता है। 

श्री राधामोहन सिंह ने यह भी ज़ोर दिया कि बोर्ड ने नारियल विकास के लिए जो नई पहल शुरू की हैं, उन्हें करीब से जानने का मौका मिला है । उल्लेखनीय है कि देश में अब तक 9720 नारियल उत्पादक समितियाँ, 700 नारियल उत्पादक फेडरेशन तथा 61 नारियल उत्पादक कंपनियाँ गठित हुई हैं। श्री सिंह ने कहा कि मुझे उम्मीद है कि इन कृषक समूहों के माध्यम से ही बोर्ड की सारी योजनाओं का कार्यान्वयन किया जाएगा और उत्पादों का प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात में भी किसान अपना अधिकार जमा लेंगे। नारियल क्षेत्र के कुशलता विकास कार्यक्रम फ्रेंड्स आफ कोकनट ट्री और नीरा तकनीशियन प्रशिक्षण कार्यक्रम भी बोर्ड का सराहनीय प्रयास रहे हैं । इस योजना के अधीन 5200 बेरोज़गार युवकों को नारियल पेड़ पर चढ़ने तथा पौधा संरक्षण कार्यों पर और 2805 को नीरा तकनीशियन प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। 

केंद्र सरकार के प्रयासों के बारे में बताते हुए श्री सिंह ने कहा कि नारियल किसानों के लिए खुशखबरी है कि केंद्रीय सरकार ने मिल्लिंग खोपरा का न्यूनतम समर्थन भाव 5550 रु. से 5950 रु. और बाल खोपरा का 5830 रु. से 6240 रु. तक बढाया है । सरकार ने क्रूड पाम तेल का आयात शुल्क 7.5% से 12.5% और आरबीडी पाम तेल का 15% से 20% तक भी बढाया है और इससे देशीय बाज़ार में पाम तेल महंगा पडेगा और नारियल तेल की मांग बढ जायेगी । यही नहीं, केन्द्रीय सरकार की नई विदेश व्यापार नीति 2015-20 में नारियल उत्पादों के निर्यात को बढावा देने केलिए इनके निर्यात (एफओबी) मूल्य का 5% तक प्रोत्साहन के रूप दिया जाता है। यही नहीं, भविष्य में नारियल उत्पादों के निर्यात में उछाल के आसार भी हैं क्योंकि नारियल उत्पादों का मूल्य अत्यंत प्रतिस्पर्धात्मक हो रहा है । इस वित्त वर्ष की शुरुआत में ही भारत से मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका को नारियल तेल का निर्यात करने लगा है जहां से हम पिछले वर्षों में आयात कर रहे थे। डेसिक्केटड नारियल का भी भारत से यह पहली बार इस वर्ष बडी मात्राओं में यूएस और यूरोप में निर्यात हो रहा है । 

इस मौके पर श्री राधा मोहन सिंह ने 8 वर्गों में 14 व्यक्तियों को पुरस्कार प्रदान किए। श्री सिंह ने कहा कि सारे पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि मुझे यकीन है कि इससे नारियल के विकास क्षेत्र की प्रगति होगी और किसानों को प्रेरणा भी मिलेगी और नारियल की खेती से आमदनी बढायेंगे। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि वे आशा करते हैं कि बोर्ड अपने प्रयासों द्वारा किसानों एवं अंशधारकों की उम्मीदों को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोडेंगे। हमारा देश नारियल के उत्पादन और उत्पादकता में ही नहीं प्रसंस्करण और निर्यात में भी विश्व में अग्रणी देश बन पायें और स्वास्थ्य जगत में नारियल की अनगिनत खूबियां उभर कर आयें। 

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