Wednesday, September 14, 2016

महाराणा प्रताप की लड़ाई के बाद से अपने घर नहीं लौटे गडिया लुहार



फरीदाबाद-(abtaknews.com) कई साल पहले हुई चितौडगढ़ की लड़ाई के बाद अपने घरों को छोडकर जगह-जगह रह रहे गडिया लुहार लौटकर न तो अपने प्रदेश गए और न ही घर। अब तो उन्हे पता ही नहीं है कि उनका वहां कोन सा घर था और कहा जमीन थी। कभी यहां तो कभी वहां अपना ढेरा लगाकर लोहा कूटने वाले गडिया लुहारों को बसाने के लिए न तो केन्द्र सरकार ने कभी सौचा और न ही राजस्थान सरकार ने उनकी सुध ली। 

आम जरूरत के लोहे के सामान बनाने वाले गढिया लुहार आपको कहीं भी लोहा कूटते हुए मिल जायेगें, लेकिन न तो स्थाई ठोर ठिकाना है और न ही काम-धंधा। केवल औजार बनाकर अपनी जीवन व्यापन करते है। कच्चे घर या फिर बेल गाडियों में ही इनके परिवार बढ़े और फिर उसी काम में लग गए, जैसा उनके बुजुर्ग करते आएं है। कई साल पहले महाराणा प्रताप की लड़ाई के समय हुए भंयकर मंजर के बाद इन गढिया लुहारों को अपना घर-बार छोडना पड़ा था। तब से वे एक से लेकर दूसरे प्रदेश व शहर भटक रहे है और जीवन यापन के लिए गाडियों में ही अस्थाई घर बनाकर लोहे का सामान बनाते है। 

फरीदाबाद में रह रहे ओम प्रकाश व इतवारी गडिया लुहारों ने अबतक न्यूज़ पोर्टल टीम को बताया कि वे कभी लौट कर अपने प्रदेश व शहर नहीं गए। हरियाणा, यूपी व पंजाब में ही उनके लोग अस्थाई रूप से रहकर काम कर रहे है। सरकार ने भी कोई ऐसा कानून नहीं बनाया कि उन्हे फिर से उनके प्रदेश व शहर में स्थापित कर सकें। पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए तो केन्द्र व राज्य सरकार ने कई योजनाएं बनाई। लेकिन अपने ही देश के शरणार्थियों के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई। इन लोगों का कहना है कि अब तो वहां दूसरे प्रदेशों के लोग रहते है। कभी वे जाते भी है तो उन्हे भगा दिया जाता है। फरीदाबाद में ही उन्हे अब 40 साल से अधिक हो चुके है। उन्हे तो याद तक नहीं है कि उनके बुजुर्ग कब और कैसे आए थे।



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