Thursday, September 22, 2016

शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति में मानवीय गुणों का विकास करना है;- कप्तान सिंह सोलंकी



चण्डीगढ़, 22 सितंबर(abtaknews.com ) हरियणा के राज्यपाल प्रो० कप्तान सिंह सोलंकी ने कहा कि शिक्षा का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति में मानवीय गुणों का विकास करना है। यदि व्यक्ति के मन में समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी का भाव न हो उसका शिक्षा प्राप्त करना व्यर्थ है।  उन्होंने यह बात आज गुरु जंभेश्वर विज्ञान एवं तकनीकी विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्यातिथि विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान करते हुए कही। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभाकर प्रभु व वेदों पर वैज्ञानिक शोध संस्थान की निदेशक सरोज बाला को पीएचडी की मानद उपाधि प्रदान की। कार्यक्रम में 105 विद्यार्थियों को पीएचडी, 507 विद्यार्थियों को पीजी व 338 को यूजी की उपाधियां प्रदान की गईं। विभिन्न पाठ्यक्रमों में टॉप करने वाले 103 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल भी प्रदान किए गए।


विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एवं राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी ने युवाओं से कहा कि परिवार, समाज और राष्ट्र को उनसे बहुत सी अपेक्षाएं हैं। हर व्यक्ति का उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सपना पूरा नहीं हो पाता है। इसलिए यहां से डिग्री पाने वाले हर युवा का मकसद समाज और देश की तरक्की में योगदान देना होना चाहिए। केवल पढ़-लिख लेना और डिग्री पाना ही शिक्षा का उद्देश्य नहीं है बल्कि आपके माध्यम से समाज में बदलाव आए, यह अधिक महत्वपूर्ण है। स्वामी विवेकानंद ने भी कहा था कि सही अर्थों में मानव गुण विकसित करना शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए। प्रो. सोलंकी ने युवाओं से आह्वान किया जब वे समाज की धारा में शामिल हों तो उनका व्यक्तित्व अलग से दिखना चाहिए तभी उनके द्वारा प्राप्त की गई शिक्षा का महत्व है। उन्होंने कहा कि आपके परिवार व समाज का ऋण आपकी यहां तक की यात्रा की सफलता का आधार है। शिक्षा पूर्ण होने पर गुरु दक्षिणा मांगने की परंपरा निभाई जाए तो समाज व देश के प्रति अपने कत्र्तव्य का सच्चाई से निर्वहन करना ही आपके द्वारा दी जाने वाली गुरु दक्षिणा होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि 21वीं शताब्दी में ऐसे लोगों की आवश्यकता है जिनके मन में और व्यवहार में राष्ट्रीयता की भावना झलके। जब हम सब भारत के घटक बनेंगे तभी देश सच्चे अर्थों में फिर से विश्वगुरु बनेगा। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार पूरा शरीर एक है और इसके एक अंग को होने वाली पीड़ा सभी अंगों को पीड़ा देती है, उसी प्रकार हमारा राष्ट्र पुरुष भारत देश भी एक है और ऐसा भाव देश के हर नागरिक में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब संयुक्त राष्ट्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोलते हैं तो इस भाव से बोलते हैं कि उनके माध्यम से पूरा भारत बोल रहा है। 21वीं शताब्दी का भारत जाग रहा है और निश्चित ही आने वाला समय हम भारतीयों का होगा।   विश्वविद्यालया के कुलपति प्रो. टंकेश्वर कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए उन्हें विश्वविद्यालय की गतिविधियों व उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने विश्वविद्यालय के 21 वर्षों की यात्रा का वर्णन करते हुए बताया कि इस विवि की रैंकिंग देश के सभी विश्वविद्यालयों में 21वीं है जो प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि 2002 से लगातार ए ग्रेड की स्थिति में रहे इस विवि में 49 नियमित तथा 16 दूरवर्ती पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने राज्यपाल प्रो. कप्तान सिंह सोलंकी को स्मृति चिह्न व शॉल भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर मुख्य संसदीय सचिव डॉ. कमल गुप्ता, गुजवि रजिस्ट्रार डॉ. अनिल पुंडीर, प्रो. कुलदीप बंसल, लुवास के कुलपति श्रीकांत शर्मा व पूर्व कुलपति आरपी वाजपेयी भी मौजूद थे।

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