Tuesday, September 20, 2016

केंद्रीय योजनाओं के निष्पादन में राज्यों को तेजी लानी चाहिए: नरेन्द्र तोमर


केंद्र सरकार ने राज्यों से आग्रह किया है कि वे विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाएं। गुवाहाटी, असम में ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्रियों के अखिल भारतीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेय जल और स्वच्छता मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने कहा कि भारत का विकास आंतरिक रूप से गांवों के विकास से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आजादी के 70 साल होने के बावजूद भारत आज भी अनेक विकासात्मक मानकों के आधार पर पीछे चल रहा है।
श्री तोमर ने कहा कि आजादी के बाद पहली बार श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार ने कई प्रमुख केंद्रीय योजनाओं को पूरा करने के लक्ष्य वर्षों को निर्धारित किया है अन्यथा इन्हें सामान्य रूप से निष्पादित किया जा रहा था। उन्होंने जल्दी ही शुरू की जाने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) नामक एक आवास कार्यक्रम का उदाहरण देते कहा कि एसईसीसी जनगणना, 2011 को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019 तक पात्र लाभार्थियों को एक करोड़ घर उपलब्ध कराए जाएंगे और इंदिरा आवास योजना की पुरानी योजना के तहत 40 लाख अधूरे बने मकानों को भी पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 तक, समाज के सभी वर्गों के वंचित वर्गों को प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत पक्के मकान दिये जाएंगे।
इसी तरह, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के मुद्दे पर श्री तोमर ने कहा कि वर्ष 2011-2014 के बीच, दैनिक रूप से केवल 73 किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का भी निर्माण किया गया जबकि 2014 से 2016 के बीच यह बढ़कर प्रति दिन 100 किलोमीटर हो गया और इस वर्ष एक दिन में 140 किलोमीटर तक सड़कों का निर्माण हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी 15 प्रतिशत ग्रामीण सड़कों में कोल्डमिक्स, फ्लाई ऐश, जिओ - टैक्सटाइल्स, प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थों जैसी हरित प्रौद्योगिकियों का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने राज्यों से इस तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग करने का अनुरोध किया है। उन्होंने राज्यों से सड़क परियोजनाओं को समय पर पूरा करने के लिए केंद्रीय कोष और प्रोत्साहन प्राप्त करने का आग्रह किया है क्योंकि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए बजट की कोई बाधा नहीं है।
श्री तोमर ने कहा कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास के अलावा आजीविका और कौशल जैसे कार्यक्रम ग्रामीण गरीबों की आय बढ़ाने के अलावा उनके जीवन में बदलाव ला सकते हैं। उन्होंने बताया कि देश में 27 लाख स्वयं सहायता समूह हैं और उसकी 3 करोड़ से भी अधिक महिला सदस्य हैं और उन्होने स्थानीय लाभदायक उत्पादों का निर्माण करने के लिए 30,000 करोड़ रुपये के बैंक ऋण का लाभ उठाया है। श्री तोमर ने कहा के मोटे तौर पर लगभग 15 करोड़ परिवारों के सदस्यों को आजीविका मिशन के तहत लाया गया है। उन्होंने राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे इनके लिए उचित बाजार तलाशने में मदद करें ताकि ये लोग अपने उत्पादों को लाभदायक मूल्य पर बेच सकें।
स्वच्छ भारत मिशन के बारे में उन्होंने राज्य सरकारों से अनुरोध किया कि वे व्यवहारिक परिवर्तन के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चलाएं। उन्होंने यह भी कहा कि स्वच्छ मिशन सरकारी कार्यक्रम नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे एक जन आंदोलन बनाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि सिक्किम ऐसा पहला राज्य है जो पूरी तरह ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बन गया है। 19 जिले, 249 ब्लॉक और 80,000 से अधिक गांव ओडीएफ बन गए हैं। श्री तोमर ने दोहराया कि श्री नरेन्द्र मोदी ने 2 अक्टूबर, 2019 तक, जो महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती है, भारत को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हालांकि यह लक्ष्य बहुत कठिन है, लेकिन अगर इसे प्राप्त करने की इच्छा शक्ति मजबूत हो तो इस लक्ष्य को अभी भी प्राप्त किया जा सकता है।

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