Saturday, September 10, 2016

डिपो होल्डर की मनमानी का शिकार हो रहे हैं गांव सागरपुर निवासी, महीनों से नहीं मिला राशन


फरीदाबाद 10 सितंबर - ( abtaknews.com ) बल्लभगढ के गांव सुनपेड का डिपो होल्डर सभी नियमों को ताक पर रखते हुए कोटे में आने वाली खाद्य सामिग्री को सागरपुर में न बांटते हुए अपने ही गांव में बांट रहा है जिससे सागरपुर गांव के सैंकडों बीपीएल कार्ड धारकों को महीनों से खाद्य सामिग्री नहीं मिली है, जिसकी शिकायत सरपंच से की गई तो सरपंच ने साफ साफ बोलते हुए कह दिया कि आपने हमें वोट नहीं दिये थे जो करना है अब आप ही करो। मामला एसडीएम के संज्ञान में पहुंच चुका है जिसपर एसडीएम कार्यवाही करने की बात कर रहे हैं।  हरियाणा सरकार गरीबों के लिये चाहे कितनी भी सुविधायें मुहिया करवा दे मगर उन्हीं के निचले अधिकारी उन सुविधाओं में पलीता लगाने से नहीं चूक रहे हैं, ऐसा ही एक मामला बल्लभगढ के गांव सागरपुर में सामने आया है जिसमें गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बीपीएल कार्ड धारकों को इन दिनों खाद्य सामिग्री के रूप में कुछ भी नहीं दिया है, अगर कुछ दिया जा रहा है तो वो परेशानी। दरअसल पिछले करीब तीन माह से सागरपुर गांव के सैंकडों बीपीएल कार्ड धारक अपने हक  के लिये एक गांव से दूसरे गांव तक भटक रहे हैं उसके बाद भी उन्हें उनका हक नहीं दिया जा रहा है, कोटे के रूप में मिलने वाली खाद्य साम्रिगी से ही गरीबों के बच्चों को भरपेट खाना मिलता है क्योंकि बाजार की महंगाई को देखते हुए वो बाहर से खाद्य सामिग्री नहीं खरीद सकते।
इस बारे में परेशान बीपीएल कार्ड धारको से बात की गई तो उन्होंने बताया कि उन्हें पिछले तीन माह से राशन नहीं मिल रहा है क्योंकि उनका डिपो होल्डर पहले सागरपुर में ही राशन बांटता था तो उन्हें समय से राशन मिल जाता था जब से सुनपेड गांव में डिपो होल्डर बना है तब से वो सागरपुर राशन बांटने के लिये नहीं आता है सभी सागरपुर वालों को सुनपेड बुलाता है जोकि सागरपुर से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर है, इसकी शिकायत उन्होंने गांव के सरपंच से भी कि तो सरपंच ने बदले की भावना दिखाते हुए कहा कि गांव वालों ने उन्हें वोट नहीं दिये थे इसलिये वो उनके लिये कुछ नहीं करेगा।
वहीं इस पूरे मामले में एसडीएम पार्थ गुप्ता से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके पास हाल ही में ये मामला सामने आया है वो इस पूरे मामले की जांच करेंगे, कोटे का नियम होता है जिस गांव का भी कोटा है वो उसी गांव में बंटता है।


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