Thursday, September 8, 2016

एस्कॉर्टंस अस्पताल की लापरवाही ने ली पत्रकार की जान,पत्रकारों ने किया 6 घंटों तक विरोध प्रदर्शन , हुआ मामला दर्ज


फरीदाबाद 8 अगस्त(abtaknews.com)। विवादों में रहे फरीदाबाद के एस्कॉटस अस्पताल की लापरवाही ने आज एक पत्रकार की जान ले ली। सचिन खेड़ा नाम के पत्रकार टोटल टीवी के लिए पिछले लंबे समय से  काम कर रहे थे और सिनियर पत्रकार थे जिन्हें 29 तारीख को बुखार की शिकायत के बाद भर्ती कराया गया था । जिनका मेडिक्लेम था अस्पताल ने मेडिक्लेम की रकम की पूर्ति के लिए पत्रकार को एडमिट कर लिया जिसके चलते उन्होंने उन्हें ठीक ही नहीं होने दिया दिन पर दिन उनकी तबियत बिगड़ गई लेकिन अस्पताल पत्रकार और उनके परिजनों को ठीक होने का आस्वासन देते रहे। बुखार की बिमारी में लाखो का बिल बना दिया और बीती रात पत्रकार सचिन खेड़ा की तबियत और बिगड़ती गई उनको सांस लेने में दिक्कत हो रही थी जिसके बारे में उन्होंने और उनके परिजनों ने डाकटरो को कई बार बताया लेकिन डाक्टरों ने उनकी कोई सुनवाई नहीं की और जब तबियत जादा बिगड़ी तो उनका आनन् फानन में इलाज शुरू किया और उनका डाइलिसिस कर दिया। आखिर  इलाज में लापरवाही  बरतने के चलते सचिन खेड़ा की बीती रात ही मौत हो गई। अस्पताल पर लापरवाही की शिकायत पुलिस प्रशासन को देने के बावजूद पुलिस ने कोई कार्रवाही नहीं की। पूरे फरीदाबाद का मिडिया जगत 6 घंटे तक अस्पताल गेट पर धरना देता रहा, तब जाकर पुलिस ने एस्कार्टस अस्पताल के डा. मिगलानी और आईसीयू स्टाफ के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया। पत्रकार सचिन खेडा के शव का पोस्टमार्टम तीन डाक्टरों के पैनल द्वारा कराया गया। 
वही आपने साथी सचिन खेड़ा की मौत की खबर सुनकर और साथी पत्रकात सुबह इक_ा हुए और अस्पताल के खिलाफ  लापरवाही का मामला दर्ज करने की मांग करने की जिसके बाद अस्पताल ने पत्रकारो को हटाने के लिए पुलिस बुला ली लेकिन पत्रकारो ने मौके पर पहुंचे डीसीपी पुरन चंद पवार से अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करने की मांग की लेकिन डीसीपी ने अस्पताल का पक्ष लेते हुए डॉक्टर के खिलाफ  मुकदमा दर्ज करने के लिया साफ़ मना कर दिया और मौके से चले गए । जिसके बाद सभी पत्रकार अस्पताल के गेट पर धरने पर बैठ गए ।धरने पर बैठे पत्रकारो के बिच इलाज करने वाले डॉक्टरों को बुलाया गया जिसके बाद उन्होंने भी इलाज में लापरवाही बरतने और हैवी डोज देने की बात काबुली। लेकिन पांच घंटे तक धरने पर बैठे पत्रकारो की सुनने दुबारा न डीसीपी साहब आये और न ही सी पी साहब मौके पर पहुंचे । काफी ज्दोजहद के बाद आखिर पुलिस ने पत्रकारो को सांत करने के लिए डॉक्टर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया ।
वही मौके पर पहुंचे  एसीपी राजेश कुमार की माने तो उन्होंने  अस्पताल के डाकटरो के खिलाफ इलाज में लापरवाही बरतने का मुकदमा दर्ज कर लिया है शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। रिर्पोट आने के बाद उचित कारवाही की जायेगी। 
वहीं मृतक पत्रकार के भाई राजन का कहना है कि सचिन को पहले लीवर में इंफेक्शन के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां से वह सारी रिर्पोट ठिक आने के बाद घर आ गया था। लेकिन फिर बुखार के चलते वह पुन: अस्प्ताल पंहुचा तो डाक्टरों ने पता नहीं उसे क्या दिया कि उसका सारा शरीर नीला पड़ गया और उसकी मौत हो गई। लाखों रूपए का बिल बनाने के बाद उन्हे पत्रकार की मौत की खबर दी गई। पुलिस इस बावत शिकायत की गई। लेकिन पुलिस ने उनकी नहीं सुनी। जब पत्रकारों ने इस मामलें को जोर-शोर से उठाया और विधायक व दूसरे नेता भी वहां पंहुचने लगे तो दूसरे थाने में जाकर एस्कार्टस अस्पताल के डा. मिगलानी व आईसीयू स्टाफ के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करना पड़ा। 
मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रीखा ने मामलें में देरी होने के कारण माफी मांगते हुए कहा कि संबंधित थाने का कम्प्यूटर खराब था, इसलिए दूसरे थाने में जाकर एफआईआर दर्ज करनी पड़ी। उन्होने कहा कि पत्रकार सचिन के परिजनों को इस मामलें में पूरा न्याय मिलेगा। 
वही अब देखना यह है की विवादों में रहे एस्कॉर्टस अस्पताल और डॉक्टरों के खिलाफ पुलिस कितनी ईमानदारी से कारवाही करती है। जब पत्रकार की मौत और समस्त पत्रकारों के 6 घंटे मशक्कत करने के बाद पुलिस रपट दर्ज करने में इतनी देरी लगा सकती है तो फिर आम व्यक्ति का कैसा हाल होता होगा, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।

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