Thursday, September 29, 2016

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने तटरक्षक कमांडरों के 35वें सम्मेलन का उद्घाटन किया



रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने तटरक्षक मुख्‍यालय में तटरक्षक कमांडरों 35वें सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रक्षा मंत्री ने न केवल परिसंपत्तियों की तैनाती के द्वारा समु्द्री और तटीय सुरक्षा बढाने के लिए भारतीय तटरक्षक बल के प्रयासों की सराहना की, बल्कि तटीय सुरक्षा नेटवर्क चरण-1 के प्रभावी उपयोग की भी बहुत प्रशंसा की। उन्‍होंने उम्‍मीद जाहिर की कि सी एस एन चरण-2 को भी समय पर लागू किया जाएगा। वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य के कारण उन्‍होंने भारतीय तटरक्षक बल से पेट्रोलियम गश्‍त बढ़ाकर तटीय सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के लिए भी कहा ताकि समुद्र के माध्यम से राष्ट्र विरोधी तत्वों की घुसपैठ को रोका जा सके।

भारतीय तटरक्षक बल के अधिकारियों और अन्‍य जनों को उल्‍लेखनीय अतुल्‍य समुद्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए अपने कर्तव्‍यों का निर्वहन करने में दिखाए गए समर्पण और पेशेवर रूख की सराहना करते हुए उन्‍होंने कहा कि तटरक्षक बल ने अपनी स्‍थापना से ही नाविकों की सुरक्षा में उल्‍लेखनीय सेवा की है। उन्होंने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल ने पाकिस्‍तान और श्रीलंका की एजेंसियों के साथ भारतीय मछली पकड़ने वाली नौकाओं की सुरक्षा के बारे में सक्रिय प्रयास किए, जिससे संदेह के आधार पर पकड़ने के मामलों में काफी कमी आई। उन्‍होंने यह जानकर प्रसन्‍नता जाहिर की कि फिलहाल कोई भी भारतीय मछुआरा श्रीलंका की हिरासत में नहीं है। 

रक्षा मंत्री ने तटरक्षक बल को उसकी परिचालन निपुणता और सेवा में प्रगति, मानव श्रम और नए अधिग्रहण से संबंधित मामलों के सम्‍बन्‍ध में रक्षा मंत्रालय से सभी सहायता दिए जाने का वायदा किया। उन्होंने भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' की नीति को साकार करने के प्रयासों के माध्यम से सभी रैंकों में समग्रता को बढ़ावा देने के लिए भारतीय तटरक्षक बल के प्रयासों का स्वागत किया और उसके बेड़े को मजबूत करने के लिए भारत में निर्मित जहाजों की आपूर्ति के लिए आदेश दिया। उन्होंने तटरक्षक कमांडरों के सम्मेलन की सफलता और सार्थक विचार-विमर्श के लिए शुभकामनाएं दीं। 

इस सम्मेलन में रक्षा मंत्रालय और भारतीय तट रक्षक (आईसीजी) के वरिष्‍ठ अधिकारियों ने भाग लिया, जिसमें तटरक्षक बल के महानिदेशक राजेंद्र सिंह, अपर निदेशकों और तटरक्षक बल के क्षेत्रीय कमांडरों ने भाग लिया। इस सम्‍मेलन का हर वर्ष आयोजन किया जाता है, जिसमें सभी क्षेत्रीय कमांडर भविष्य के रोडमैप, विभिन्न नीति और सामरिक मुद्दों पर चर्चा करते हैं। 

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