Monday, September 19, 2016

25 अक्तूबर को ‘अखिल भारतीय ठेका समाप्त दिवस’ का आयोजन ;-सुभाष लाम्बा



फरीदाबाद,19 सितम्बर(abtaknews.com ) इलैक्ट्रीसिटी इम्पलाईज फेडरेशन ऑफ इंडिया (ईईएफआई) केन्द्र, राज्य और प्राईवेट सैक्टर की पॉवर यूटिलिटीज से शोषण व भ्रष्टाचार पर आधारित ठेका प्रथा को समाप्त करवाने की मांग को लेकर 25 अक्तूबर को ‘अखिल भारतीय ठेका समाप्त दिवस’ का आयोजन करेगी। जिसके तहत अखिल भारतीय स्तर पर बिजली कर्मचारियों द्वारा धरने, प्रदर्शन व आक्रोश रैलियों का आयोजन किया जाएगा और केन्द्रीय श्रम एवं रोजगार व ऊर्जा मंत्री को ज्ञापन दिया जाएगा। जिसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्यों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। यह जानकारी देते हुए इलैक्ट्रीसिटी इम्पलाईज फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव पी एन चौधरी, उपाध्यक्ष देवेन्द्र हुड्डा , सचिव सुभाष लाम्बा व आल हरियाणा पावर वर्करज यूनियन के उपमहासचिव रमेशचन्द ने बताया कि फेडरेशन ने 19 राज्यों की 44 पॉवर यूटिलिटीज का अध्ययन किया है। जिसके अनुसार इन अलग-अलग पॉवर यूटिलिटीज में लगभग 22 लाख बिजली कर्मचारी व मजदूर काम करते हैं। जिसमें केवल 10 लाख नियमित कर्मचारी हैं और बाकी 12 लाख ठेका आधार पर कार्यरत मजदूर हैं, जो नियमित कर्मचारी के समान काम करते हैं, लेकिन उनके वेतन, छुट्टियों, काम करने के घंटों और सभी प्रकार की सेवा शर्तों में भारी अंतर है। इन ठेका कर्मचारियों का दिन-प्रतिदिन शोषण बढ़ता जा रहा है।

फेडरेशन के सचिव सुभाष लाम्बा ने बताया कि फेडरेशन ने 1 दिसम्बर, 2016 को केन्द्रीय ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल व केन्द्रीय राज्यमंत्री श्रम एवं रोजगार (स्वतंत्र प्रभार) बंदारू दत्तात्रेय को पत्र लिखकर पॉवर यूटिलिटीज में ठेका कर्मचारियों का हो रहे शोषण की ओर ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने बताया कि पॉवर स्टेशनों (जहां ठेका आधार पर कर्मी लगाने का स्कोप है) का निर्माण, नवीनीकरण और आधुनुकीकरण का काम लगभग पूरा हो चुका है और अब ऑपरेशन, जनरेशन, ट्रांसमिशन व डिस्ट्रीब्यूशन का कार्य स्थायी प्रकृति का है। लेकिन स्थाई प्रकृति के इस कार्य पर भी  गैर कानूनी तरीके से ठेका मजदूरों को लगाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार ने बिजली उत्पादन व वितरण में अप्रैल, 2013 में औद्योगिक त्रिपक्षीय कमेटी का गठन किया था, ताकि ठेका कर्मचारियों के हकों की रक्षा की जा सके। लेकिन श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार ने इस कमेटी के गठन से अब तक कोई बैठक ही नहीं की। उन्होंने बताया कि नियमित कर्मचारी बड़ी संख्या में रिटायर होते जा रहे हैं और सरकारें रेगूलर भर्ती करने की बजाय ठेका आधार पर भर्तियां कर रही है। उन्होंने बताया कि पॉवर यूटिलिटीज में कॉन्ट्रैक्ट लेबर (रेगूलराईजेशन एण्ड एबोलिशन) एक्ट-1970 और इसके नियमों की पूरी तरह अनदेखी ही नहीं की जा रही बल्कि इसको कूड़ेदान में डाल दिया गया है। राज्यों की पॉवर यूटिलिटीज में जहां यूनियनों का दबाव है, वहां कुछ सहुलियतें ठेका कर्मचारियों को मिल पा रही हैं।
उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में ठेका कर्मचारी चालू लाईनों पर कार्य करते हुए अकालमृत्यु का शिकार हो रहे हैं, उनकी सुरक्षा एवं कम्पनशेसन की कोई स्थाई नीति तक नहीं है। लेकिन केन्द्र एवं राज्य सरकारें न तो इनके आश्रितों को स्थाई नौकरियां दे रही और न ही इन्हें नियमित करने की कोई ठोस नीति बना रही। मामूली से वेतन में बिजली क्षेत्र में कार्यरत नौजवान अपनी जान हथेली पर रखकर नौकरी करने पर मजबूर हैं। बिजली सेवाओं से ठेका प्रथा को समाप्त करवाने और ठेका आधार पर लगे कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करवाने की मांग को लेकर पूरे देश के नियमित व ठेका बिजली कर्मचारी सडक़ों पर उतरेंगे और सरकार को ठेका प्रथा समाप्त करने पर मजबूर करेंगे।


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