Saturday, August 6, 2016

पेयजल और स्वच्छता मंत्री ने स्वच्छ भारत मिशन पर मीडिया से सहयोग मांगा

 


पेयजल एवं स्वच्छता एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने आज प्रमुख मीडिया घरानों के प्रतिनिधियों को संबोधित किया और स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की प्रगति पर उन्हें अद्यतन (अपडेट) किया। यह कार्यक्रम पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय द्वारा मंत्रालय के अधिकारियों और राष्ट्रीय मीडिया के बीच भागीदारी के एक मंच के रूप में आयोजित किया गया, ताकि ‘स्वच्छ भारत’ के सपने को साकार करने के लिए किए जा रहे देशव्यापी प्रयासों के बारे में उन्‍हें संवेदनशील बनाना जा सके।
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय में सचिव श्री परमेश्वरन अय्यर ने इस मिशन की दिशा में अब तक हुई प्रगति और ‘खुले में शौच से मुक्त भारत’ के सपने को साकार करने के लिए अपनाई जा रही रणनीति के अवलोकन के साथ कार्यवाही शुरू की। उन्होंने कहा कि मिशन के तहत नजरिए में बदलाव पर विशेष जोर दिया जा रहा है और शौचालय के उपयोग को काफी महत्व दिया जा रहा है।
पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री श्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने विशेष जोर देते हुए कहा कि  साफ-सफाई भारतीय विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और उन्‍होंने इस बात पर रोशनी डाली कि पहली बार केन्द्र सरकार की किसी पहल में इतनी व्‍यापक भागीदारी और जीवन के सभी क्षेत्रों की ओर से इतनी सारी हस्तियों की भागीदारी देखी जा रही है।नागरिकों की भागीदारी के महत्व पर विशेष बल देते हुए मंत्री महोदय ने मीडिया से मिशन का समर्थन करने या इसमें सहयोग देने और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका को पूरा करने का आग्रह किया।नियमित रूप से अद्यतन के लिएकृपया स्वच्छ भारत मिशन की आधिकारिक सोशल मीडिया पहलों का अनुसरण करें :
देश के 91 प्रमुख जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति
04 अगस्‍त, 2016 को समाप्‍त सप्‍ताह के दौरान देश के 91 प्रमुख जलाशयों में 71.556 बीसीएम (अरब घन मीटर) जल का संग्रहण आंका गया। यह इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 45 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के कुल संग्रहण का 96 प्रतिशत तथा पिछले दस वर्षों के औसत जल संग्रहण का 96 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता 157.799 बीसीएम है, जो समग्र रूप से देश की अनुमानित कुल जल संग्रहण क्षमता 253.388 बीसीएम का लगभग 62 प्रतिशत है। इन 91 जलाशयों में से 37 जलाशय ऐसे हैं जो 60 मेगावाट से अधिक की स्‍थापित क्षमता के साथ पनबिजली संबंधी लाभ देते हैं।

क्षेत्रवार संग्रहण स्‍थिति 

उत्‍तरी क्षेत्र उत्‍तरी क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश, पंजाब तथा राजस्‍थान आते हैं। इस क्षेत्र में 18.01 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले छह जलाशय हैं, जो केन्‍द्रीय जल आयोग (सीडब्‍ल्‍यूसी) की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 8.41 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 47 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 80 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 52 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी कमतर है।

पूर्वी क्षेत्र 

पूर्वी क्षेत्र में झारखंड, ओडिशा, पश्‍चिम बंगाल एवं त्रिपुरा आते हैं। इस क्षेत्र में 18.83 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 15 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 7.43 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 39 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 48 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 37 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण कमतर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

पश्‍चिमी क्षेत्र 

पश्‍चिमी क्षेत्र में गुजरात तथा महाराष्‍ट्र आते हैं। इस क्षेत्र में 27.07 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 27 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 13.34 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 49 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 42 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 50 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कमतर है।

मध्‍य क्षेत्र

मध्‍य क्षेत्र में उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, मध्‍य प्रदेश तथा छत्‍तीसगढ़ आते हैं। इस क्षेत्र में 42.30 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 12 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 25.24 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 60 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 55 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 41 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है और यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से भी बेहतर है।

दक्षिणी क्षेत्र 

दक्षिणी क्षेत्र में आंध्र प्रदेश (एपी), तेलंगाना (टीजी), एपी एवं टीजी (दोनों राज्‍यों में दो संयुक्‍त परियोजना), कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु आते हैं। इस क्षेत्र में 51.59 बीसीएम की कुल संग्रहण क्षमता वाले 31 जलाशय हैं, जो सीडब्ल्यूसी की निगरानी में हैं। इन जलाशयों में कुल उपलब्‍ध संग्रहण 17.74 बीसीएम है, जो इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 33 प्रतिशत है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में इन जलाशयों की संग्रहण स्‍थिति 32 प्रतिशत थी। पिछले दस वर्षों का औसत संग्रहण इसी अवधि में इन जलाशयों की कुल संग्रहण क्षमता का 53 प्रतिशत था। इस तरह पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुये संग्रहण की तुलना में चालू वर्ष में संग्रहण बेहतर है, लेकिन यह पिछले दस वर्षों की इसी अवधि के दौरान रहे औसत संग्रहण से कमतर है।

पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्‍यों में जल संग्रहण की स्थिति बेहतर है उनमें महाराष्‍ट्र, मध्‍य प्रदेश, एपी एवं टीजी (दोनों राज्‍यों में दो संयुक्‍त परियोजनाएं), आंध्र प्रदेश और तेलंगाना शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण बराबर है उसमें कर्नाटक और केरल शामिल हैं। पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में जिन राज्यों में जल संग्रहण कमतर है उनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्‍थान, पश्‍चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, त्रिपुरा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्‍तीसगढ़ और तमिलनाडु शामिल हैं। 
फेसबुक पेज Swachh Bharat Mission - Grameen | ट्विटर हैंडल - @SwachhBharat

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