Saturday, August 6, 2016

पाकिस्‍तान में सार्क बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह का संसद में बयान


केंद्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 4 अगस्‍त, 2016 को पाकिस्‍तान में हुई सार्क के आंतरिक/गृह मंत्रियों की सातवीं बैठक में अपनी भागीदारी पर आज संसद के दोनों सदनों में वक्‍तव्‍य दिया। 

वक्‍तव्‍य का मूल पाठ हिंदी में निम्‍नलिखित है: 
“सार्क गृह मंत्रियों की 7वीं बैठक में मैंने दिनांक 04.08.2016 को भाग लिया। इस बैठक में मुख्‍य Agenda आतंकवाद, Narcotic Drugs की तस्‍करी, Cyber crime एवं Human Trafficking थे। लगभग सभी देशों ने, आतंकवाद की घोर भ्रत्‍सना की। भारत की ओर से मैंने आतंकवाद पर विशेष बल दिया -मुझे विश्‍वास है कि इस सदन के सभी सदस्‍य इस बात से सहमत होंगे- क्‍योंकि दक्षिण एशिया में शांति और खुशहाली के लिए सबसे बड़ी चुनौति और सबसे बड़ा खतरा यदि कोई है तो वह आतंकवाद है। मैंने इस बुराई को जड़ सहित उखाड़ फेंकने का पक्‍का संकल्‍प करने का आवाह्न किया। सार्क के सभी सदस्‍यों से आग्रह किया कि वे आतंकवाद को न तो Glorify करें, न ही Patronage दें। एक देश का आतंकवादी किसी के लिए भीMartyr या स्‍वतंत्रता सेनानी नहीं हो सकता। 

आतंकवाद को बढ़ावा नहीं मिले, इस हेतु मैंने कहा कि जरूरी है कि न सिर्फ आतंकवादियों और आतंकवादी संगठनों के विरुद्ध, बल्‍कि उन्‍हें समर्थन देने वाले व्‍यक्‍तियों, संस्‍थाओं, संगठनों औरराष्‍ट्रों के विरुद्ध भी कठोर से कठोर कदम उठाए जाने चाहिए। आतंकवाद की हैवानियत से तभी निपटा जा सकेगा। इसके अलावा मैंने सार्क के गृहमंत्रियों की इस बैठक में भारत की ओर से निम्‍न सुझाव रखे:- 

(i). आतंकवादियों पर विश्‍व समुदाय की सहमति से लगाए गए प्रतिबंध का सम्‍मान किया जाए। 

(ii). अच्‍छे और बुरे आतंकवाद में भेद करने की भूल कदापि नहीं की जाए। 

(iii). आतंकवाद को बढ़ावा या समर्थन देने वाले सभी States अथवा Non-states actor के विरुद्ध प्रभावी कदम आवश्‍यक हैं। 

(iv). आतंकवाद में सम्‍मिलित व्‍यक्‍तियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और उनका Extradition सुनिश्‍चित किया जाना चाहिए ताकि वे कानून से न बच पाएं। 

(v). SAARC Convention on Mutual Assistance on Criminal Matters को उन देशों द्वारा Ratify किया जाना आवश्‍यक है जिन्‍होंने अब तक इसको Ratify नहीं किया है। 

(vi). SAARC Terrorist Offences Monitoring Desk (STOMD) और SAARC Drug Offences Monitoring Desk (SDOMD)को उन देशों की सहमति की आवश्‍यकता है जिन्‍होंने अब तक इस पर अपनी सहमति नहीं दी है। मैंने भारत में महिलाओं और बच्‍चों की सुरक्षा हेतु Track Child और Operation Smile जैसे उठाए गए कदमों की ओर सार्क गृहमंत्रियों का ध्‍यान आकर्षित किया। भारत द्वारा ईमानदार, Transparent और Accountable Governance हेतु जनधन योजना और आधार जैसे कार्यक्रमों से भी सार्क गृहमंत्रियों को अवगत कराया। भारत की ओर से सार्क गृहसचिवों एवं गृहमंत्रियों की बैठक के दौरान भारत द्वारा निम्‍न Initiatives की भी घोषणा की गई :- 

1. STOMD और SDOMD का प्रभावी रूप से लागू करने हेतु भारत की ओर से तकनीकी सहायता। 

2. भारत में 22-23 सितम्‍बर को SAARC Anti Terrorism Mechanism के Experts की बैठक का आयोजन। सौभाग्‍य से,सभी सदस्‍य देशों ने इस बैठक में भाग लेने पर सहमति दी। 

3. नशीले पदार्थों की रोकथाम हेतु भारत द्वारा SAARC सदस्‍य देशों के अधिकारियों को विभिन्‍न प्रकार का प्रशिक्षण। 

4. सार्क देशों की Computer Emergency Response Teams (CERTs) की पहली बैठक भारत में आयोजित करने का प्रस्‍ताव। 

जहां तक हमारे पड़ोसी देश पाकिस्‍तान का सवाल है मैं माननीय सदस्‍यों को बताना चाहूंगा कि SAARC Convention on Mutual Assistance on Criminal Matters को उसने अब तक Ratify नहीं किया है। STOMD और SDOMD हेतु भी उनकी सहमति अभी शेष है। पाकिस्‍तान की ओर से कहा गया कि वे इस ओर शीघ्र कार्यवाही करेंगे, और मैं आशा करता हूं कि,यह “शीघ्र”, वास्‍तव में शीघ्र होगा। 

दक्षिण एशिया क्षेत्र समेत पूरी दुनिया में आतंकवाद के गहरे बादल मंडरा रहे हैं। पूरी World Community इस गंभीर खतरे से बेहद चिंतित है, ऐसा सर्व विदित है। यह इस बात से भी स्‍पष्‍ट है कि भारत ने तो इस मानवता विरोधी खतरे पर अपना स्‍पष्‍ट Messageतो दिया ही,साथ में लगभग सभी सदस्‍य देशों ने भी इस हैवानियत पर अपनी चिंता व्‍यक्‍त की। 

माननीय, अध्‍यक्ष महोदया, मैं इस बात पर बल देना चाहता हूं कि भारत का यह Message मानवता की खातिर, और मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए है। माननीय सदस्‍य इस बात पर सहमत होंगे कि प्रमुख रूप से आतंकवाद ही मानविधकारों का सबसे बड़ा दुश्‍मन है।” 

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