Tuesday, August 2, 2016

खुदादादपुर सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ने की हो रही है सांप्रदायिक कोशिश;-रिहाई मंच




लखनऊ,02 अगस्त 2016(abtaknews.com ) रिहाई मंच ने आजमगढ़ पुलिस द्वारा संजरपुर के तीन युवकों की आज दिखाई गई मुठभेड़ को फर्जी करार देते हुए पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि आजमगढ़ के निजामाबाद थाने के रानीपुर गांव के पास जिन तीन युवकों सलमान, आफताब और अकरम को पुलिस मुठभेड़ में घायल और गिरफ्तार दिखाकर आजमगढ़ एसएसपी अजय कुमार साहनी अपनी पीठ थपथपा रहे हैं उन तीनों युवकों को गुरुवार 28 जुलाई को संजरपुर चैक, छाऊं मोड़ के पास जब वे बाजार में थे तब गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि इन तीनों की गिरफ्तारी जब कई थानों की पुलिस और पीएसी लगाकर की गई थी तो आखिर उसी दिन इन्हें अदालत के सामने न पेश करना पुलिस की आपराधिक मानसिकता को उजागर करता है। वहीं जिस तरह से गुरुवार को पुलिस ने कहा कि संजरपुर गांव के पास पुलिस की घेरेबंदी के दौरान बदमाशों द्वारा की गई फायरिंग में सरायमीर थाने पर तैनात आरक्षी नीरज मौर्य व औरंगजेब गोली लगने से घायल हो गए और घटना को अंजाम देकर बदमाश मौके से भागने में सफल रहे यह एक फर्जी पुलिसिया कहानी के सिवा कुछ नहीं है। वहीं पुलिस ने आज जिस तरीके से इस मामले को मई में खुदादादपुर सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ते हुए सीओ सीटी केके सरोज पर गोली चलाने वालों से जोड़ रही है, वह स्पष्ट करता है कि आजमगढ़ पुलिस प्रशासन सांप्रदायिक हिंसा में अपनी संलिप्तता व कमजोरी छिपाने के लिए पूरे मामले को सांप्रदायिक रूप देने की कोशिश कर रही है। 
मंच ने एसएसपी अजय कुमार साहनी को तत्काल निलंबित करने और फर्जी मुठभेड़ में घायल बताए जाने वाले युवकोें के अपहरण व अवैध हिरासत में हत्या की कोशिश करने का पुलिस पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। मंच ने कहा है कि सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के निर्वाचन क्षेत्र में ऐसे सांप्रदायिक जेहनियत के एसएसपी की तैनाती सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े करती है कि वो कहीं आजमगढ़ को दूसरा मुजफ्फरनगर तो नहीं बनाना चाहती है। 
प्रतापगढ़ से रिहाई मंच नेता शम्स तबरेज खान ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि प्रतापगढ़ के सांगीपुर क्षेत्र में स्थित घुइसरनाथ धाम मंदिर परिसर से विस्फोटकों के साथ गिरफ्तार बिहारीगंज निवासी राजकुमार और अमेठी के गौरीगंज निवासी तुलसीराम के मामले की उच्च स्तरीय जांच हो। उन्होंने कहा कि जिस तरीके से सूबे में सांप्रदायिक तत्व सक्रिय हैं और लगातार सांप्रदायिक घटनाएं हो रही हैं ऐसे में इस तरह से विस्फोटकों की बरामदगी की घटना को सामान्य घटना नहीं माना जा सकता। जिस तरीके से इसे जिला प्रशासन सामान्य घटना बताते हुए टाल रहा है वह पुलिस की मंशा पर भी सवाल उठाता है। उन्होंने कहा कि अगर यही घटना किसी मस्जिद में हुई होती तो न जाने कहां-कहां से इसके तार जोड़ दिए जाते। लेकिन चूंकि विस्फोटक मंदिर से मिले हैं और पकड़े गए लोग मुस्लिम नहीं हैं इसलिए इस पूरे मामले को प्रशासन हल्का करने में लगा हुआ है ताकि असली षडयंत्रकारियों को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रतापगढ़ में इससे पहले भी सपा सरकार में ही अस्थान गांव में पचास से अधिक मुसलमानों के घर साम्प्रदायिक आतंकवादियों ने पुलिस की मौजूदगी में जला दिए थे जिसमें कमजोर विवेचना करके पुलिस ने अपराधियों को बचा लिया था। ऐसे में मंदिर में विस्फोटकों की बरामदगी और पुलिस द्वारा उसे सामान्य घटना के बतौर प्रचारित करना सरकार की मंशा पर गम्भीर सवाल खड़े करती है। 

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