Monday, August 29, 2016

धर्मांतरण के कारण कई परिवार टूटने की कगार पर, सक्रिय हुए ग्रामीण




बल्लभगढ़(abtaknews.com ) इसे आस्था कहे या अंधविश्वास। ऐसा ही देखने को मिल रहा है दयालपुर और उसके आसपास के गांवों में। जहां किसी परिवार ने मानसिक दबाव में तो किसी ने आस्था के नाम पर धर्म परिवर्तन कर लिया है। धर्मांतरण के कारण गांवों की डेमोग्राफी भी बदल रही है। परिवारों में कलह बढ़ रहा है, कई परिवार टूटने की कगार पर है। 
17वीं शताब्दी में सिखों के छठे गुरू हरगोविंद सिंह के तीर से बने मीठे पानी के नानकसर (नानक सरोवर) के लिए प्रसिद्व गांव दयालपुर गन्ने की खेती और गुड़ के लिए जाना जाता है। लेकिन, पिछले कुछ महीनों में यहां धर्मांतरण की ऐसी बयार बही कि देखा-देख आधा दर्जन परिवार धर्म परिवर्तन कर चुके है। हालांकि अधिकांश परिवार धर्म परिवर्तन की बात को नकार रहे है। उनका कहना है कि उन्होंने सिर्फ आस्था बदली है, धर्म नहीं बदला है। गांव के विजयपाल (छिछल) कहते है कि उसका परिवार अब भगवान ईशा और बाईबिल में विश्वास करते है। पत्नी कमला बताती है, कि उसका मंझला बेटा संजू को जन्म से दिल में छेद था। इस बिमारी के लिए उन्होंने सात साल मेडिकल में इलाज कराया। लेकिन आराम नहीं मिला। किसी ने बताया कि ऊंचा गांव जाकर प्रार्थना करवा लो, तो बच्चा ठीक हो सकता है। कमला कहती है कि विश्वास कर उन्होंने ऊंचा गांव स्थित धार्मिक स्थल में 'चंगाईÓ कराई। प्रार्थना के बाद अब संजू पूरी तरह ठीक है। उन्होंने धर्म नहीं बदला है, मगर वे अब ईशा के विश्वासी है। इसीतरह गांव की दूसरी महिला कहती है कि वे भी ईशा के विश्वासी हो गए है। क्योंकि उसकी कृपा से उसकी 20 साल पूरानी बीमारी सिर्फ प्रार्थना से ठीक हो गई। ऐसी ही बातें गढख़ेड़ा निवासी नानक और उसकी पत्नी राधा करते है, कहते है कि पत्नी राधा सांस की बिमारी से ग्रस्त थी। कई साल इलाज कराया, आराम नहीं मिला। एक दिन ऊंचा गांव स्थित धार्मिक स्थल में 'चंगाईÓ कराई, जिसके बाद वह ठीक हो गई। हालांकि इस बातों को गांव के लोग मनगढ़त कहते है। गांव में चर्चा है कि यह सब पैसे के चक्कर में किया जा रहा है। धर्मांतरण के लिए लोगों को पैसा दिया गया है।
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हर रोज होते है झगड़े----ग्रामीण राजपाल बीसला बताते है कि धर्मांतरण के कारण गांव में कई परिवार टूटने की कगार पर है। ये लोग महिलाओं को बहला-फुसलाकर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाते है। महिलाएं इनके झांसे में आ जाती है। जिसके कारण परिवारों में झगड़े बढ़ रहे है। पिछले दिनों एक महिला ने अपने पति को जलाकर मारने की कोशिश भी की। परिवार एक-दूसरे से दूर हो रहे है। 
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अपना धर्म छोड़ दूसरा अपनाने की मुख्य वजह समाज में व्याप्त असमानता है, हाशिए पर पहुंचा दिए गए लोग दबदबे या ऊंची हैसियत वाली जाति और समुदाय से अपमानित और उपेक्षित महसूस करने पर यह कदम उठाते है। 
डा. आलोकदीप, समाजशास्त्री 
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ऊंची जाति के हिंदुओं और समाज के कमजोर तबके के बीच संपर्को और संवाद की कमी की वजह से दूसरे धर्मों के नेता उनकी भावनाओं का शोषण कर उन्हें धर्मांतरण को उकसाते है। 
संजय त्यागी, जिला अध्यक्ष, सामाजिक समरसता मंच

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