Thursday, August 4, 2016

निर्धारित अवधि के अंदर समाज से बंधुआ मजदूरी का सफाया जरूरी: श्रम एवं रोजगार मंत्री


नई दिल्ली, अगस्त 04,2016(abtaknews.com) श्रम एवं रोजगार राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) श्री बंडारू दत्‍तात्रेय ने कहा है कि मानव सम्‍मान और स्‍वतंत्रता हर लोकतांत्रिक समाज का महत्‍वपूर्ण अंग हैं और बंधुआ मजदूरी को भारतीय समाज से एक निर्धारित समय के अंदर समाप्‍त करना जरूरी है। इसके लिए प्रत्‍येक नागरिक को प्रयास करना होगा। उन्‍होंने कहा कि बंधुआ मजदूरी के मुद्दे पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने की आवश्‍यकता है ताकि बंधुआ मजदूरी के अभिशाप को हमेशा के लिए खत्‍म किया जा सके। श्री दत्‍तात्रेय ने कहा कि मुक्‍त किए गए बंधुआ मजदूरों, बच्‍चों और महिलाओं के पुनर्वास के लिए विभिन्‍न कल्‍याणकारी योजनाएं चलाई जानी चाहिए।
बंधुआ मजदूरी उन्‍मूलन पर वीवी गिरि राष्‍ट्रीय श्रम संस्‍थान, नोएडा में आयोजित दो दिवसीय राष्‍ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए श्री दत्‍तात्रेय ने कहा कि न्‍यायपालिका, जीवंत मीडिया और सिवि‍ल सोसायटी, जिला प्रशासन, पुलिस और राज्‍य श्रम विभागों पर दबाव डालने के लिए महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाते हैं ताकि बंधुआ मजदूरी करवाने वाले अ‍पराधियों के खिलाफ कार्रवाई हो और मुक्‍त किए गए बंधुआ मजदूरों का पुनर्वास संभव हो। उन्‍होंने कहा कि मुक्‍त किए गए बंधुआ मजदूरी में संलग्‍न बच्‍चों, महिलाओं और वयस्‍कों को बेहतर शिक्षा, कौशल आदि प्रदान किया जाना चाहिए ताकि उनका सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण हो सके। उन्‍होंने कहा की बंधुआ मजदूरी के उन्‍मूलन के लिए मौजूदा प्रणाली में सुधार की आवश्‍यकता है। बंधुआ मजदूर पुनर्वास, 1978 संबंधी केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना की समीक्षा मई 2000 में की गई थी तथा आज की चिंताओं तथा चुनौतियों के मद्देनजर इसमें और सुधार की जरूरत महसूस की जा रही है। इसे ध्‍यान में रखते हुए मंत्रालय ने एक संशोधित योजना तैयार की है और सभी राज्‍य सरकारों, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग, संबंधित मंत्रालयों को उनके सुझावों के लिए भेजी गई है। यह संशोधित योजना सुझाव प्राप्‍त होने के बाद केंद्र सरकार ने 17 मई, 2016 से प्रभावी करने की रजामंदी दे दी है।
इस कार्यशाला में विभिन्‍न राज्‍यों/केंद्र शासित प्रदेशों के श्रम आयुक्‍त एवं प्रतिनिधि, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग एवं सिविल सोसाटी के प्रतिनिधि, अकादमिक क्षेत्रों तथा गैर सरकारी संगठनों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस कार्यशाला का आयोजन अंतरराष्‍ट्रीय श्रम संगठन (भारत-केंद्र) के सहयोग से किया जा रहा है। नोबेल पुरस्‍कार प्राप्‍त डॉ. कैलाश सत्‍यार्थी ने उद्घाटन समारोह में प्रमुख वक्‍तव्‍य दिया।
दो दिवसीय राष्‍ट्रीय कार्यशाला मे मौजूदा नियमों की समीक्षा की जा रही है, जिसमें बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्‍मूलन) नियम, 1976 शामिल है। इसके प्रभावशाली कार्या‍न्‍वयन के लिए संशोधित बंधुआ मजदूर पुनर्वास योजना, 2016 पर भी चर्चा की जाएगी। कार्यशाला के पहले दिन यानी 4 अगस्‍त, 2016 को सरकारी अधिकारियों, राष्‍ट्रीय मानवाधिकार आयोग, पुलिस और न्‍यायपालिका सहित सभी प्रमुख हितधारकों के साथ परामर्श किया जा रहा है। दूसरे दिन 1976 नियमों में संशोधन करने के लिए सुझावों पर चर्चा की जाएगी। मंत्रालय द्वारा तैयार किए जाने वाले संशोधन प्रस्‍तावों के मसौदे पर भी चर्चा होगी। कार्यशाला में केंद्र और राज्‍य के आला अधिकारी, विद्वान एवं विशेषज्ञ, मजदूर संघों तथा स्‍वयंसेवी क्षेत्र के प्रतिनिधि हिस्‍सा ले रहे हैं। 

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