Saturday, August 27, 2016

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर) का हाईकोर्ट अलग से हो;- सतेन्द्र भड़ाना



फरीदाबाद-अगस्त 27,2016 जिला बॉर एसोसिएशन के पूर्व वरिष्ठ उपप्रधान व को-ऑप्टिड मैम्बर पंजाब एण्ड हरियाणा बॉर काऊंसिल चंडीगढ एव वरिष्ठ अधिवक्ता सतेन्द्र भड़ाना ने केन्द्र सरकार से मांग की है कि राष्टीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर) का अलग से हाईकोर्ट हो। सतेन्द्र भड़ाना ने बताया कि इस वक्त राष्टीय राजधानी क्षेत्र(एनसीआर)इलाके में दिल्ली,गुडग़ांव,फरीदाबाद,गौतमबुद्वनगर,नोएडा,नूंह,फिरोजपुरझिरका,पलवल,हथीन,रोहत,सोनीपत,पानीपत,बुलंदशहर,सिकंदाबाद,मेरठ,गाजियाबाद,हापुड़,अलवर,भरतपुर,किशनगढ़,तिजारा आदि आते है। उन्होनें बताया कि फरीदाबाद,पलवल,गुडग़ांव,हथीन,फिरोजपुर झिरका की हाईकोर्ट चंडीगढ़ में स्थित है। जबकि नोएडा,गाजियाबाद,मेरठ,बुलदंशहर के हाईकोर्ट इलाहबाद में है। इसके अलावा   भरतपुर,अलवर के हाईकोर्ट जयपुर बैंच आौर जोधपुर हाईकोर्ट है। सतेन्द्र भड़ाना ने बताया कि एनसीआर क्षेत्र के लोगों को अपनी-अपनी हाईकोर्ट में अपने केस के लिए उपस्थित होने के लिए आने जाने ही कम से कमं 1-2 दिन का समय लग जाता है। जिससे एनसीआर क्षेत्र के लोगों के समय की बर्बादी के साथ साथ पैसे की बर्बादी भी होती है और मानसिक परेशानी अलग झेलनी पड़ती है। सतेन्द्र भड़ाना ने बताया कि इन हाईकोर्ट में केसों की संख्या अधिक होती है और जजों की संख्या भी कम है। पिछले 10-15 सालों से कई केस इन हाईकोर्ट में पेंडिग पड़े है जिनका निपटारा जल्दी से संभव नहीं है। इसी कारण लोगों को न्याय मिलने में भी देरी हो रही है। उन्होनें बताया कि समय और धन की बर्बादी ना हो इसके लिए एनसीआर का हाईकोर्ट अलग से होना चाहिए। सतेन्द्र भड़ाना ने कहा कि जब एनसीआर एक्ट 1985 यहां पर लागू है तो लोगों की सुविधाओं को देखते हुए कि उन्हें समय पर न्याय मिल सके,लोग न्याय से वंचित न रह सकें इसके लिए अलग हाईकोर्ट आज की जरूरत बन गया है। यह जनता के हित की बात है। सतेन्द्र भड़ाना ने बताया कि एनसीआर का हाईकोर्ट दिल्ली,नोएडा,गुडग़ांव,सोनीपत व फरीदाबाद कहीं भी एनसीआर क्षेत्र में स्थापित हो इसके लिए वे एनसीआर के जिला कोर्ट के वकीलों से भी मदद लेकर इस मुहिम को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होनें बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र योजना एक्ट,एन.सी.आर रूल्स 11 फरवरी 1985,एनसीआर योजना बोर्ड रेगूलेशन्स,19 एनसीआर रूलस एंंड एमेन्डमेंट स्कीम प्लानिंग बोर्ड 1997(मिनिस्ट्री ऑफ अरबन डेवेलपमेंट गवर्मेंट ऑफ इंडिया) पहले से ही लागू है और एनसीआर के विकास के लिए कार्य कर कर रहे है। दिल्ली से लगा होने के कारण और दिल्ली के विस्तार के कारण इनपर एनसीआर बोर्ड विकास के लिए काम कर रहा है और अलग से योजना बना रहा है। इसमें महत्वपूर्ण बात यह है कि 36वीं बोर्ड मीटिंग जोकि 15जून 2011 को हुई थी। जिसमें(कांऊटर मेगनेट क्षेत्र और जोडऩे की योजना है। जिसमें हिसार,अंबाला,कानपुर,कोटा और जयपुर को जोडऩे की तैयारी चल रही है। इसलिए यह और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि एनसीआर क्षेत्र के लोगों की सहूलियत और उन्हें परेशानी से बचाने के लिए जल्दी से जल्दी एनसीआर क्षेत्र में एक अलग हाईकोर्ट को मंजूरी दी जाए।


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