Sunday, August 28, 2016

कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर करे सरकार;-- सुभाष लांबा


फरीदाबाद, 28 अगस्त(abtaknews.com ) सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा ने सातवें वेतन आयोग को लागू करने बारे गठित कमेटी को अपने सुझाव भेजते हुए 24 हजार न्यूनतम वेतनमान और राज्य की प्रति व्यक्ति आय को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय कर्मचारियों की बढ़ोतरी से राज्य कर्मचारियों को 30 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ सिफारिशें लागू करने की मांग की है। संघ के महासचिव सुभाष लाम्बा व वरिष्ठ उपप्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने आज यहां पत्रकारों से रूबरू होते हुए बताया कि जनवरी, 2014 से प्रदेश के कर्मचारियों को मिल रही 2 हजार रुपए अंतरिम राहत को खत्म करने की बजाय मूल वेतन में जोडऩे का सुझाव भी कमेटी ने दिया है। संघ नेताओं ने केन्द्रीय वेतन आयेाग द्वारा प्रस्तावित 2.57 गुणांक फैक्टर को बढ़ाकर 3.35 करने, वार्षिक वेतन वृद्धि की दर 3 से बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने और उक्त सिफारिशें लागू करने से पहले पंजाब के समान वेतनमान देने सहित सभी विभागों के कर्मचारियों की वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग की है। भविष्य में वेतन पुर्ननिरिक्षण 10 वर्ष की बजाय 5 वर्ष में करने का सुझाव कमेटी को दिया है। विभिन्न विभागों में खाली पदों पर भर्ती व विभागों का जन आवश्यकताओं के अनुसार विस्तार, पद सृजन व नियमित भर्ती पर भी जोर दिया है। संघ ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी पंजाब व केन्द्र के समान बढ़ोतरी देने व वन रैंक-वन पैंशन देने की मांग का प्रमुखता से उठाया है। लाम्बा व शास्त्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि अगर संघ के जायज, तर्कसंगत व न्यायसंगत सुझावों की सरकार ने अनदेखी की तो कर्मचारी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेंगे। पत्रकार वार्ता में इन नेताओं के साथ जिला प्रधान अशोक कुमार, वरिष्ठ उपप्रधान गुरचरण सिंह खंाडिया व सचिव युद्धवीर सिंह खत्री आदि उपस्थित थे।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश महासचिव सुभाष लाम्बा, वरिष्ठ उपप्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने बताया कि प्रति व्यक्ति आय में हरियाणा राष्ट्रीय औसत से 1.79 गुणा व पंजाब से 1.46 गुणा ज्यादा है। इसलिए राज्य कर्मचारियों को केन्द्रीय कर्मचारियों से 30 प्रतिशत अधिक दिए जाएं और यह वेतनमान किसी भी दृष्टि से पंजाब से कम नहीं होने चाहिएं। उन्होंने बताया कि संघ ने कमेटी से 30 सितम्बर तक तय सीमा में अपनी रिपोर्ट देने और सरकार से अक्तूबर माह का वेतन नए वेतनमानों के साथ देने की मांग की है। संघ ने सभी प्रकार के कच्चे कर्मचारियों को बिना शर्त पक्का करने, समान काम-समान वेतन देने, ठेकेदारी व्यवस्था को समाप्त करने, अनियमित कर्मचारियों को सभी तरह की सुविधाएं व श्रम कानूनों की पालना सुनिश्चित करना और नियमितिकरण की स्थाई व निरंतर जारी रहने वाली 240 दिन सेवा पर नियमितिकरण नीति बनाने की भी मांग की।
संघ नेताओं ने बताया कि संघ ने नेशनल पैंशन स्कीम को समाप्त कर जनवरी, 2006 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को पुरानी पैंशन स्कीम के दायरे में लाने, वार्षिक वेतन वृद्धि की दर 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत करने, अधिकतम-न्यूनतम वेतनमान का अनुपात 7:1 करने, पदोन्नति-एसीपी 8-16-24 वर्ष की बजाय 4-9-14 करने आदि मांगों को प्रमुखता से उठाया है। उन्होंने बताया कि कमेटी को दिए गए सुझावों में दिल्ली के आसपास जिलों व चंडीगढ़, पंचकुला में 30 प्रतिशत व बाकी हरियाणा में 20 प्रतिशत मकान किराया भत्ता देने, मेडिकल भत्ता 3 हजार व कैशलेस मेडिकल सुविधा देने, शिशु शिक्षा भत्ता 3 हजार प्रतिमाह, पूरी शिक्षा व सभी बच्चों के लिए देने, विकलांग भत्ता 5 हजार, यातायात भत्ता 1500, वर्दी भत्ता 1000, जोखिम भत्ता 5000, जटिल क्षेत्र-जटिल परिस्थिति भत्ता 1000, प्रदूषित वातावरण भत्ता 2000, मोबाईल भत्ता 500 रुपए प्रतिमाह और लीव इनकैशमेंट को 300 से बढ़ाकर 360 दिन करना आदि शामिल है। संघ ने स्थाई व निरंतर चलने वाले कार्यों के लिए स्थाई कर्मचारी लगाने और ठेका प्रथा को बंद करने का सुझाव भी दिया है। प्रदेश महासचिव सुभाष लाम्बा ने बताया कि केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों व कर्मचारी संघों की फेडरेशनों के आह्वान पर होने वाली 2 सितम्बर की राष्ट्रव्यापी हड़ताल ऐतिहासिक एवं अभूतपूर्व होगी। इसकी तैयारी के लिए सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा व विभागीय यूनियनों के वरिष्ठ नेताओं के नेतृत्व में सैंकड़ों टीमें फील्ड में उतरकर कर्मचारियों से उनके कार्यस्थलों पर जाकर सीधा संपर्क कर रही हैं। उन्होंने बताया कि इस हडताल में सभी सरकारी, अर्ध सरकारी, बोर्डों, निगमों, नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर परिषदों व विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों के अलावा विभिन्न ट्रेड यूनियनों से जुड़े 5 लाख से ज्यादा कर्मचारी व मजदूर शिरकत करेंगे।
------------------------



loading...
SHARE THIS

0 comments: