Thursday, August 4, 2016

डीएवी काॅलेज में परमाणु ऊर्जा जन-जागरूकता अभियान





फरीदाबाद 04 अगस्त,2016(abtaknews.com ) विद्युत एक ऐसा आधार स्त्रोत है जिसका देश के आर्थिक विकास से अत्यंत घनिष्ट संबंध होता है. देश में सकल संस्थापित क्षमता में उल्लेखनीय वृद्घि के बावजूद हम आज भी बिजली की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं, भारत में ऊर्जा की खपत तेजी से बढ़ रही है. पिछले एक दशक में ऊर्जा की मांग में कई गुना ईजाफा हुआ है, और इसे पूरा करने में केन्द्र और राज्य सरकार दोनों नाकाम रहे है।जन जागरूकता अभियान का संचालन कर रहे संदीप पाल ने बताया कि बिजली संकट से जूझ रही देश की जनता को किस प्रकार से 24 धण्टे सस्ती बिजली उपलब्ध हो। इस उद्देश्य से न्यूक्लियर पावर कार्पोरेशन आॅफ इण्डिया द्वारा (भविष्य में ऊर्जा का नया विकल्प क्या हो) जन जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है इसी के तहत डीएवी शताब्दी महाविद्यालय फरीदाबाद के राजनीति विज्ञान / विज्ञान विभाग की ओर से परमाणु ऊर्जा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस बार यह कार्यक्रम बिजली उत्पादन करने के नए तरीकों पर विचार करने की सलाह दी जा रही है। उन्होने कहा कि ऊर्जा की मांग वर्तमान में प्रयोग में लाये जा रहे पारंपरिक तरीके से पूर्ण नहीं हो सकती है तथा देश में कोयले तथा गैस के भंडार सीमित हैं तथा जीवाश्म ईंधन प्रचलित बिजलीघरों से उत्पन्न होने वाली ग्रीन हाउस गैसों के प्रति विश्व की बढ़ती चिन्ताओं के कारण आने वाले समय में परमाणु ऊर्जा को प्रोत्साहित करना तथा प्रयोग में लाना अति आवश्यक है।
भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को दुनिया में सबसे आधुनिक तथा सुरक्षित श्रेणी में रखा जाता है, भारत का दीर्घकालीन परमाणु ऊर्जा विद्युत उत्पादन कार्यक्रम देश में उपलब्ध विशाल थोरियम भंडार पर आधारित है।
देश में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम को लगभग 45 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, देश की वर्तमान न्यूक्लियर विद्युत क्षमता 5780 मेगावाट है, 11वीं पंचवर्षीय योजना के अनुसार इसकी क्षमता बढ़कर 10080 मेगावाट से अधिक करने का लक्ष्य है।
परमाणु ऊर्जा के नये संयंत्र महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक तथा उत्तर प्रदेश में निर्माणाधीन हैं तथा हरियाणा के कुमहारिया तथा मध्यप्रदेश के बरगी के अतिरिक्त गुजरात में हाईसिटी तिर्डी, पश्चिम बंगाल में हरिपुर तथा आंध्र प्रदेश में कोण्वाड़ा में भी परमाणु बिजलीघर स्थापित किये जाने का सैद्घांतिक अनुमोदन भी अक्टूबर.09 में ही हो चुका है।
परमाणु ऊर्जा के तकनीकी पहलुओं की जानकारी उपलब्ध कराने तथा जन साधारण में इस विषय में फैली भ्रांतियों को दूर करने के लिये विज्ञान प्रसार जो भारत सरकार के विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी विभाग की संस्था है. के द्वारा देश भर में जागरूकता कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। साथ ही उन्होने लोगों को परमाणु ऊर्जा से सम्बन्धित जानकारी देते हुए कहा कि आज फ्रांस, रूस, चाईना, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका समेत विश्व के कई अन्य देषों ने परमाणु ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल कर खूब तरक्की की है। आजादी के इतने साल बाद भी आज देश का 20 प्रतिशत अंधकार में डूबा है, उक्त क्षेत्र के निवासियों को न बेहतर शिक्षा मिल पा रही है और न ही चिकित्सा सेवा उपलब्ध है और वह आर्थिक रूप से भी पिछडे़ हुऐ है। भारत में कुल 21 परमाणु संयन्त्र पूरी तरह से सुरक्षित काम कर रहे है। यूरोपीय देश फ्रांस में 90 फीसदी बिजली का उत्पादन परमाणु संयन्त्र से होता है। जबकि भारत में कुछ लोगों द्वारा परमाणु ऊर्जा को लेकर गलत प्रचार किया जा रहा है।
डीएवी शताब्दी काॅलेज के प्राचार्य डाॅ सतीश आहूजा ने कहा कि आज फ्रांस, रूस, ब्राजील, चीन, जर्मनी, अमेरिका जैसे देशों ने परमाणु ऊर्जा का बेहतर इस्तेमाल कर खूब तरक्की की है। ऐसे में हम पीछे क्यूं रहे। हमें भ  विश्व में उक्त देशों की भांति आगे बढना चाहिए।कार्यक्रम में डाॅ सुनीती आहूजा डाॅ शिवानी, डाॅ विनीता सप्रा,, डाॅ बबीता सिंह ने भी अपनी बात बच्चों के समक्ष रखी।
यह देशव्यापी कार्यक्रम न्यूक्लियर पॉवर कार्पोरेशन आॅफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) द्वारा समर्थित है और कई राज्यों के विद्यालयों और अन्य संस्थानों में प्रतियोगिता और रैली आयोजित किये जा रहे हैं। इससे पहले यह कार्यक्रम हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेष, मध्यप्रदेष के कई जिलों में आयोजित किये जा चुके हैं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में समाज सेवी संस्था (साथी ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी) भी एनपीसीआईएल का सहयोग कर रही है।
   
भारत में चल रहे परमाणु ऊर्जा संयंत्र
कुल 21 यूनिटए कुल उत्पादन 5780 मेगावाट
विवरण.
तारापुर एटॉमिक पॉवर स्टेशन ;महाराष्ट्रद्ध 4 यूनिट दृ 1400 मेगावाट
राजस्थान एटॉमिक पॉवर स्टेशन ;रावतभाटाए कोटाद्ध 6 यूनिट दृ 1180 मेगावाट
मद्रास एटॉमिक पॉवर स्टेशन ;कलपक्कमए चेन्नईद्ध 2 यूनिट 440 मेगावाट
कैगा संयंत्र ;कर्णाटकद्ध 4 यूनिट 880 मेगावाट
कुडनकुलम एटॉमिक पॉवर प्रोजेक्ट ;तमिल नाडुद्ध 1 यूनिट 1000 मेगावाट
नरोरा एटॉमिक पॉवर स्टेशन ;उत्तर प्रदेशद्ध 2 यूनिट 440 मेगावाट
काकरापार एटॉमिक पॉवर स्टेशन ;गुजरातद्ध 2 यूनिट दृ 440 मेगावाट
कुल उत्पादन 5780 मेगावाट
बिजली की आवश्यकता
1947 में जब देश आजाद हुआ थाए उस समय मात्र 1362 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता था
बिना बिजली उत्पादन के आधुनिक तरीकों को अपनाए देश की बिजली की मांग को किसी भी सूरत में पूरा नहीं किया जा सकता है
इस समय देश में लगभग 238420 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के जुलाई 2015 तक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार थर्मल से 190625 मेगावाटए हाइडो से 42015 मेगावाट तथा न्यूलियर से 5780 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है
एक अनुमान के अनुसार भारत में वर्ष 2030 में ऊर्जा आवश्यकता 9ए60ए000 मेगावाट होगीण्


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