Friday, August 5, 2016

हरियाणा ग्रंथ अकादमी करेगी पुस्तकों का डिजिटलीकरण ;प्रो. चौहान



फरीदाबाद(abtaknews.com )अच्छी पुस्तकों के साथ मित्रता और उनका नियमित स्वाध्याय करना जीवन में सफलता का मूल मंत्र है। विश्व में विज्ञान, कारोबार, अध्यात्म अथवा सार्वजनिक जीवन में कामयाबी के कीर्तिमान स्थापित करने वाली अधिकांश विभूतियों को उनकी अध्ययनशीलता ने आगे बढऩे में सर्वाधिक मदद की। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. वीरेन्द्र सिंह चौहन ने यह टिप्पणी वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकीविश्वविद्यालय और ग्रंथ अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक परिसंवाद में शिक्षकों और विद्यार्थियों  के साथ विमर्श के दौरान की। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. संजय शर्मा ने की। 
 अपने संबोधन में प्रो. चौहान ने कहा कि पुस्तकों के प्रति उनका अनुराग और स्वाध्याय स्वभाव ही स्वामी विवेकानंद और शहीद भगत सिंह जैसे महापुरूषों के व्यक्तित्वों को संवारने और शिखर तक पंहुचाने वाला प्रभावी तत्व बना। इसी प्रकार अत्यंत व्यस्त जीवन होने के बावजूद वारेन बफे से लेकर मार्क जुकरबर्ग सरीखी वर्तमान समय की जानी-मानी हस्तियां अच्छी किताबें पढऩे के लिए नियमित रूप से समय निकाल लेती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश-देश में नई पीढ़ी पुस्तकों से और नियमित स्वाध्याय के दूर जा रही है। यह चिंता का विषय है। प्रो. चौहान ने विद्यार्थियों का आवाहन किया कि वे स्वाध्याय की आदत विकसित करें चूंकि इसके बिना सबल और प्रभावी व्यक्तित्व का निर्माण संभव नहीं।

हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष ने कहा कि अकादमी हरियाणा के लोगों में पुस्तकों के प्रति लगाव पैदा करने और भाषाओं के प्रचार-प्रसार के लिए राज्य के स्वर्ण जयंती वर्ष के दौरान प्रदेश व्यापी अभियान चलाएगी। इस अभियान को धुर ग्रामीण अंचल तक ले जाया जाएगा। उन्होंने बताया कि अकादमी केंद्र और राज्य सरकार की मदद से विश्वविद्यालय स्तरीय पुस्तकें तैयार करवाने, उनके प्रकाशन और वितरण के कार्य में जुटी है। आने वाले समय में अकादमी के सभी प्रकाशनों के डिजिटाइजेशन की योजना तैयार की जा रही है। इसका मकसद है अच्छी पुस्तकों को ई-बुक समेत विभिन्न अत्याधुनिक फार्मेटों में उपलब्ध करवा कर नई पीढ़ी तक उन्हें पहुंचाना है।  देश के समसामयिक मीडिया परिदृश्य पर चर्चा करते हुए प्रो. वीरेन्द्र सिंह चौहान ने कहा कि भारत का संविधान मीडिया को भी उतनी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है जितनी किसी भी अन्य नागरिक को। अभिव्यक्ति की इस आजादी के विशेषज्ञता पूर्वक इस्तेमाल करके ही मीडिया प्रतातांत्रिक व्यवस्था के चौथे स्तंभ की भूमिका अदा करता है। चौथा पाया स्वतंत्र और मजबूत रहे यह आवश्यक है। मगर इसी अधिकार का दुरूपयोग कर देश को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ तत्व भी चौथे पाये  की ओढऩी ओढ़ अपना काम करते देखे जा सकते हैं। मीडिया की स्वतंत्रता पर आघात किए बिना ऐसे देशघाती लोगों पर अंकुश लगाना समय की आवश्यकता है। 

इस से पूर्व ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष और शिक्षाविद प्रो. चौहान का विश्वविद्यालय परिसर में पंहुचने पर कुलपति प्रो.दिनेश कुमार और कुलसचिव डा. संजय शर्मा ने स्वागत किया। गोष्ठी के अंत में प्रो चौहान ने समसामयिक मसलों पर विद्यार्थियों और शिक्षकों के प्रश्नों के उत्तर दिए। कार्यक्रम का  संचालन पत्रकारिता विभाग की समन्वयक दिव्यज्योति ने किया। अधिष्ठïाता डा. संदीप ग्रोवर और प्रो. प्रदीप डिमरी ने भी इस अवसर पर अपने विचार प्रकट किए।

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