Monday, August 29, 2016

नेत्रहीनों को छड़ी से छुटकारा दिलायेगा ‘बेल्ट का बक्कल’



फरीदाबाद, 29 अगस्त,2016(abtaknews.com )वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों ने नेत्रहीनों के लिए एक ऐसी डिवाइस बनाई है, जिसकी मदद से नेत्रहीन व्यक्ति को सहारे के लिए छड़ी पकड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस डिवाइस को उन्होंने बेल्ट के बक्कल के रूप में बनाया है, जिसे आसानी से पहना जा सकता है।दरअसल, इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नई दिल्ली के वार्षिक तकनीकी उत्सव ‘एस्या-16’ में हिस्सा लेने गये इन विद्यार्थियों को एक थीम पर आधारित उपकरण बनाना था। उत्सव के हेकाथलॉन इवेंट में वाईएमसीए विश्वविद्यालय की टीम स्टैक प्वाइंटर का हिस्सा रहे करन हांडा, मयंक, मोक्ष, कुशांक तथा कौशल ने नेत्रहीनों को रोजमर्रा में आने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए एक ऐसी डिवाइस को बनाने का निर्णय लिया, जिससे नेत्रहीनों को हमेशा छड़ी पकड़कर चलने की मजबूरी से छुटकारा मिल जाये।
प्रोजेक्ट की विस्तार से जानकारी देते हुए करन हांडा ने बताया कि सबसे पहले अपनी सोच को मूर्त रूप देने के लिए उनकी टीम ने 3डी प्रिंटर तकनीक का उपयोग करते हुए स्ट्रक्चर डिजाइन किया और फिर माइक्रो कंट्रोलर और सेंसर का प्रयोग करते हुए बेल्ट पर लगने वाला एक ऐसा बक्कल बनाया, जिससे इयरफोन या हेडफोन को अटैच किया जा सकता है। इसे लगाने के बाद नेत्रहीन व्यक्ति को डिवाइस में लगे सेंसर की मदद से रास्ते में आने वाली बाधाओं की सूचना पहले ही मिल जायेगी। जैसेकि यदि रास्ते में कही सीढ़ी है या गड्ढा है तो करीब दो फुट की दूरी पर नेत्रहीन को डिवाइस में लगे सेंसर बोलकर सूचना देंगे कि आगे गढ्डा है। विद्यार्थियों ने दावा किया कि सूचना देने के लिए सेंसर की क्षमता को दूरी के हिसाब से बढ़ाया जा घटाया भी जा सकता है तथा डिवाइस को और बेहतर बनाया जा सकता है। 
करन ने बताया कि डिवाइस को बनाने में उनकी टीम को करीब 16 घंटे लगे और इस पर महज 500 रुपये की लागत आई। इस प्रोजेक्ट को इंद्रप्रस्थ सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नई दिल्ली के वार्षिक तकनीकी उत्सव में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है, जिसके तहत विद्यार्थियों ने 15 हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि भी जीती। कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने विद्यार्थियों को उनकी उपलब्धि के लिए बधाई देते हुए कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र से जुडे विद्यार्थियों के लिए व्यवहारिक ज्ञान बेहद जरूरी है। तकनीकी प्रतिस्पर्धाएं तथा उत्सव विद्यार्थियों की रचनात्मक सोच को सही दिशा देने के लिए बेहतरीन मंच साबित होते है और विद्यार्थियों को ऐसे अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में भी अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास किये जा रहे है। उन्होंने विद्यार्थियों को आश्वासन दिया कि उनकी नवीन सोच को बढ़ावा देने में विश्वविद्यालय पूरा सहयोग देगा। संकायाध्यक्ष विद्यार्थी कल्याण प्रो एस के अग्रवाल ने भी विद्यार्थियों को शुभकामनाएं दी है। 

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