Friday, August 12, 2016

वाईएमसीए यूनिवर्सिटी में वैदिक गणित पर रवि अय्यर का विशेषज्ञ व्याख्यान


 
फरीदाबाद, 12 अगस्त 2016(abtaknews.com )वाईएमसीए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, फरीदाबाद में ‘विश्व परिदृश्य में उभरता भारत’ विषय पर एक विशेषज्ञ व्याख्यान का आयोजन किया गया, जिसमें वैदिक गणित पर अपनी विशेषज्ञता रखने वाले श्री रवि अय्यर मुख्य वक्ता रहे। युवाओं को प्रेरित करने वाले इस व्याख्यान का आयोजन विश्वविद्यालय के विवेकानंद मंच द्वारा नैतिक एवं सांस्कृतिक प्रशिक्षण के लिए पहल नामक संस्था के सौजन्य से किया गया था।
श्री रवि अय्यर विश्वभर मंे 20 से अधिक देशों के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में वैदिक गणित पर 500 से अधिक कार्यशालाएं तथा 200 से अधिक योगा व प्रेरक शिविरों आयोजित कर चुके है। वर्तमान में हिन्दू स्वयंसेवक संघ के अंतर्राष्ट्रीय सह-संयोजक तथा विश्व अध्ययन केन्द्र, मंुबई के परामर्शदाता है। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ तथा कुलपति प्रो. दिनेश कुमार ने श्री अय्यर का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि श्री अय्यर के अनुभव तथा विभिन्न विषयों पर उनके ज्ञान से विद्यार्थी को लाभ होगा और उन्हें प्रेरित करेगा। कार्यक्रम का संचालन विवेकानंद मंच के संयोजक डॉ प्रदीप कुमार डिमरी ने किया।
स्वामी विवेकानंद के जीवन प्रसंगों से अपने उदबोधन का आरंभ करते हुए अय्यर ने उदाहरण प्रस्तुत कर विद्यार्थियों को बताया कि किस तरह प्रतिभाशाली भारतीयांे ने अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी विलक्षण बुद्धिमत्ता एवं योग्यता से दुनिया में देश का नाम रोशन किया है। कंप्यूटर की दुनिया में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले पेंटीयम चिप के निर्माता विनोद धाम तथायूएसपी तकनीक विकसित करने वाले अजय भट्ट एवं इंटरनेट में बदलाव लाने वाली फाइबर ऑप्टिक्स के जनक नरेन्द्र सिंह कपानी जैसी युवा प्रतिभाओं का उल्लेख करते हुए श्री अय्यर ने कहा कि इन सभी नामों को बेशक मीडिया इतनी शोहरत नहीं मिली, लेकिन आईटी व टेलीकॉम में बदलाव लाने में इनका योगदान विस्मरणीय है और विद्यार्थियों को इनसें प्रेरणा लेनी चाहिए।
श्री अय्यर ने साधनों से वंचित शतरंज व आइना भेंट करने तथा विदेशी भाषाओं की भांति ही अन्य प्रांतीय भाषा विशेष रूप से पूर्वांचल की भाषाओं को सीखने का आह्वान किया। भारतीय खेल शतरंज को वैदिक गणित से जोड़ते हुए श्री अय्यर ने कहा कि शतरंज खेलने से मस्तिष्क में तर्क शक्ति विकसित होती है, जिससे तर्कसंगत निर्णय लेने में मदद मिलती है, जो विश्व शांति के लिए बेहद जरूरी है। इसलिए, इसका प्रसार जरूरी है। इसी प्रकार, आइना प्रतिबिम्ब दिखाता है। यदि साधन से वंचित युवाओं को आइना उपलब्ध होगा तो वे आइने में प्रतिबिम्ब देखकर खुद को बेहतर ढंग से संवार पायेंगे। इससे उनमें स्वच्छता की भावना पैदा होगी और उनका व्यक्तित्व विकास होगा। उन्होंने कहा कि युवाओं को पूर्वांचल की भाषाओं से रोजमर्रा के शब्दों को सीखना चाहिए, तथा पूर्वांचल से आने वाले विद्यार्थियों के साथ विचारों का आदान-प्रदान करना चाहिए। ऐसा करने से सिक्किम, अरूणाचल और मिजोरम जैसे राज्यों से आने वाले विद्यार्थी अन्य विद्यार्थियों के साथ ज्यादा सहज महसूस कर सकेंगे और आपसी सौहार्द की भावना को बल मिलेगा।
श्री अय्यर ने युवाओं को अनुसंधान के क्षेत्र में भी आगे आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के क्षेत्र में अमेरिका के सभी प्रमुख विश्वविद्यालयों में भारतीयों व चीनियों का दबदबा है। इसका कारण उच्चतर शिक्षा व अनुसंधान के क्षेत्र में पश्चिमी देशों के युवाओं की रूचि कम होना है। ऐसे में भारतीय विद्यार्थियांे को वहां बेहतर अनुसंधान सुविधाओं का लाभ उठाना चाहिए।  डॉ संजय कुमार शर्मा ने कार्यक्रम के अंत में धन्यवाद प्रस्ताव रखा। डॉ शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि विद्यार्थियों को विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ वक्ताओं को सुनने का अवसर मिले तथा आगामी ऐसे विशेषज्ञ व्याख्यानों का क्रम जारी रहेगा। इस अवसर पर शिक्षाविद् प्रो. दयाशंकर, श्री राकेश अग्रवाल तथा श्री विनोद भी उपस्थित थे।

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