Monday, August 22, 2016

स्कूली बच्चो की लिखी किताब को मानव रचना इंस्टिट्यूट ने किया लांच


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फरीदाबाद-अगस्त 22,2016(abtaknews.com ) मानव रचना इंटरनैशनल स्कूल चार्मवुड के स्टूडेंट्स अपने लेखन की प्रतिभा को किताब के रूप में सामने लाए हैं। स्कूल के १२ उभरते लेखकों ने विविड किताब लिखी हैं। सोमवार को स्टूडेंट्स की प्रतिभाओं को किताब के रूप में लॊन्च किया गया। मानव रचना शैक्षणिक संस्थान कैंपस में आयोजित की गई बुक लॊन्च सैरीमनी में बतौर मुख्य अतिथि फिल्म व थिएटर के जाने मान नाम पद्मश्री टोल आल्टर पहुंचे। उन्होंने मानव रचना शैक्षणिक संस्थान के वाइस प्रेसिडेंट डॊ. अमित भल्ला के साथ किताब का विधिवत रूप से लॊन्च किया। 

विविड १२ कहानियों का संग्रह है। यह कहानियां मानव रचना इंटरनैशनल स्कूल चार्मवुड के स्टूडेंट्स के द्वारा अपने अनुभवों के आधार पर लिखी गई हैं। यह कहानियां अनोखी व वास्तिवक है। यह किताब अंकित झा, अन्ना स्टीजर, दीक्षा डावर हिमल भट्ट, हीरेन गुप्ता, मोक्ष मिश्रा, नाय्शा जैन. पी श्रीनाथ सात्विक, रीषिका खरबंदा, रित्विक राव, सय्यद अनसारी, सोफिया स्टीजर ने लिखी है। इसमें बोट नंबर ६७५४, मिडनाइट मैजिक, एवरिथिंग फोर समथिंग आदि कहानियां शामिल हैं। उभरते लेखकों ने यह किताब मानव रचना इंटरनैशनल स्कूल चार्मवुड की प्रिंसिपल श्रीमित संयोगिता शर्मा की देखरेख में लिखी।  
मानव रचना बेहतर इंसान बनाने का उद्देश्य रखता है और प्रतिभाओं को निखारने का मकसद लेकर चलता है। स्टूडेंट्स की प्रतिभाओं को सही माध्यम प्रदान करने के उद्देश्य से क्विल राइटर्स क्लब के एक्सपर्ट के द्वारा किताब को एडिट करवाया गया है। प्रफैशनल स्तर पर किताब तैयार करने का जरिया इन स्टूडेंट्स को स्कूल में ही मिल गया, ताकि वह स्कूल लेवल पर ही अपने लिए सही राह तलाश कर सकें।
स्टूडेंट्स की साहित्य से जुड़ी रुचि की सराहना करते हुए पद्मश्री टोम आल्टर ने कहा कि मैं प्रतिभशाली स्टूडेंट्स की किताब को लॊन्च करते हुए काफी गौरांवित महसूस कर रहा हूं। मुझे विश्वास है कि सच्चे अनुभवों के आधार पर बनाई गई यह किताब और स्टूडेंट्स को भी किताबें लिखने के लिए प्रोत्साहित करेगी। उन्होंने कहा कि मैं बहुत खुश हूं कि किताब पढ़ना आज के समय में केवल एक आदत बनकर नहीं रह गई है। उन्होंने कहा कि जिस सच्चाई के साथ बच्चों ने किताब में कहानियां लिखी हैं, वह काबिले तारीफ है। यह बच्चे २००० के बाद पैदा हुए हैं, लेकिन उन्होंने अपने एक्सप्रैशन से बताया है कि वह कितना जिंदगी के करीब है। 
उभरते लेखकों को उनकी रचनात्मक सोच के लिए बधाई देते हुए मानव रचना शैक्षणिक संस्थान (एमआरईआई) के वाइस प्रेसिडेंट डॊ. अमित भल्ला ने कहा कि हमारे स्टूडेंट्स में अपने प्रतिभा के आधार पर समाज में बदलाव लाने की क्षमता है। उन्होंने बताया कि यह डॊ. ओपी भल्ला का सपना था कि मानव रचना के स्टूडेंट्स रचनात्मकता के उद्देश्य के साथ पढ़ाए जाए और आज स्टूडेंट्स ने उनके इस सपने को पूरा किया है। यह हमारी जिम्मदेरी है कि हम हमारे बच्चों की प्रतिभाओं को सही दिशा दिखाते हुए निखार सके। मैं उम्मीद करता हूं कि इस किताब के बाद इन उभरते लेखक अपने उज्जवल भविष्य की राह तलाश कर पाएंगे। इस किताब को बनाने में मदद करने वाले सभी को मैं बधाई व शुभकामनाएं देता हूं। 
इस मौके पर एमआरईआई के अकैडमिक एक्सीलैंस की डायरेक्टर श्रीमति गोल्डी मल्होत्रा, एमआरआईएस चार्मवुड की एगजीक्यूटिव डायरेक्टर श्रीमित निशा भल्ला, एमआरईआई के मैनेजिंग डायरेक्टर डॊ. संजय श्रीवास्तव, क्विल क्लब राइटर्स की ओर से रुचिका मित्तल व अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे। 
स्टूडेंट्स लेखक दिखे उत्साहित
पहले मुझे लगता थी कि लिखना एक आसान काम है, लेकिन किताब लिखने के बाद मुझे पता चला है कि इसके पीछे कितनी मेहनत लगती है। 
अंकिता झा, ग्यारहवी स्टूडेंट
क्विल क्लब ने मुझेय वह कलम प्रदान की जिसने मेरे दिमाग और उंगलियों का सही तालमेंल बैठते हुए एक बेहतर कहानी का निर्माण किया। 
मोक्षा मिश्रा,नौवी स्टूडेंट
मैंने कहानी एक दादा और पोते के बीच के रिश्ते पर आधारित लिखी। यह अनुभव मेरे लिए बहुत अच्छा रहा। मैने सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं अपने अनुभव  के आधार पर इतनी सुंदर कहानी लिख पाउंगी।
रिषिका खरबंदा, बारहवीं क्लास
मेरे लिए स्टोरी लिखना इतना आसान नहीं था। लेकिन अपने अनुभव को किताब के रूप में उताराकर मुझे ऐसा लगा कि जैसे मैंने अपनी लाइफ की कुछ बाते शेयर की। 
दीक्षा डावर, नौंवी क्लास

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