Thursday, August 11, 2016

हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नौ शहरों में जांच स्टेशन स्थापित करेगा


चंडीगढ़, 11 अगस्त,2016(abtaknews.com )हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने राज्य के नौ शहरों में नए निरंतर परिवेशी वायु गुणवत्ता जांच स्टेशन स्थापित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान कर दी है।हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक प्रवक्ता ने आज यहां यह जानकारी देते हुए बताया कि चालू वर्ष के दौरान दिल्ली राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र में एवं इसके आसपास परिवेशी वायु गुणवत्ता के वास्तविक आंकड़े एकत्रित करने की व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के लिए ये जांच स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। यह स्टेशन पानीपत, सोनीपत, जिला रेवाड़ी में धारूहेड़ा, बहादुरगढ़, करनाल, कैथल, यमुनानगर, जिला गुडग़ांव के मानेसर और फरीदाबाद में सैक्टर- 55 एवं 56 के निकट स्थापित किए जाएंगे। गुडग़ांव एवं फरीदाबाद में पहले भी ऐसा एक-एक जांच स्टेशन स्थापित है। 
उन्होंने बताया कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की निरंतर निगरानी करने और वास्तविक जांच आंकड़े प्राप्त करने के लिए बोर्ड अत्याधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों में ऑनलाइन जांच प्रणाली स्थापित करने पर विशेष बल दे रहा है। 
उन्होंने बताया कि बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशानुसार मलनिस्सार एवं वायु उत्सर्जन गुणवत्ता की जांच के लिए प्रथम चरण में अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों तथा सांझी उपचार एवं निपटान सुविधाओं (सीटीडीएफ) में इन प्रणालियों की स्थापना की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रथम चरण में 100 बड़े एवं मध्यम स्तर के अत्यधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों या परियोजनाओं तथा सीटीडीएफ में ऑनलाइन जांच प्रणाली स्थापित की जा रही है। अब तक 69 उद्योगों में ऑनलाइन जांच उपकरण स्थापित किए जा चुके हैं और 28 उद्योगों द्वारा मलनिस्सार एवं वायु उत्सर्जन के लिए ऑनलाइन डाटा प्रदर्शित करना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन जांच प्रणाली शुरू किए जाने से उद्योगों की मैनुअल जांच नहीं करनी पड़ेगी। 
उन्होंने बताया कि कारोबार करने की सहूलियत सुनिश्चित करने के मद्देनजर बोर्ड ने जल अधिनियम 1974, वायु अधिनियम 1981 के तहत स्थापना सहमति एवं संचालन सहमति और हानिकारक कचरा (प्रबंधन, निपटान, ट्रांसबाउन्ड्री मुवमेंट)नियम, 2008 के तहत प्राधिकार प्राप्त करने की प्रक्रिया को सरल बनाया है। उन्होंने बताया कि रेड श्रेणी के उद्योगों या परियोजनाओं के लिए संचालन सहमति की अवधि को दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष और ओरेंज श्रेणी के लिए तीन वर्ष से बढ़ाकर 10 वर्ष किया गया है। इसी प्रकार, उद्योगों की सभी श्रेणियों के लिए स्थापना सहमति की अवधि को पांच वर्ष या इससे अधिक किया गया है। इससे उद्योगों का ही समय नहीं बचेगा बल्कि उन्हें बोर्ड से वर्ष दर वर्ष स्थापना एवं संचालन सहमति प्राप्त करने की परेशानी भी नहीं होगी। 
उन्होंने बताया कि जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 और हानिकारक कचरा (प्रबंधन, निपटान, ट्रांसबाउन्ड्री मुवमेंट) नियम, 2008 के प्रावधानों के अनुसार स्थापना सहमति एवं संचालन सहमति प्राधिकार आवेदनों पर निर्णय लेने के लिए प्रासंगिक नियम या अधिनियम में 120 दिनों की समय सीमा निर्धारित की गई। बहरहाल, हरियाणा उद्यम प्रोत्साहन नीति-2015 के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए बोर्ड ने सामान्य परिस्थितियों में स्थापना सहमति और संचालन सहमति के आवदेनों का निपटान 60 दिनों के भीतर करने के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि बोर्ड ने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974, वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1981 के तहत निजी क्षेत्र की 12 प्रयोगशाआलों और सार्वजनिक क्षेत्र की दो प्रयोगशाआलों को मान्यता प्रदान की है ताकि उद्योगों को सहमति कार्यों के लिए मल निस्सार एवं वायु उत्सर्जन के नमूनों की जांच की सुविधा हो सके।
प्रवक्ता ने बताया कि बोर्ड ने इस मामले में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और शहरी स्थानीय निकाय विभाग को राज़ी करके उन्हें अपने अधिकार क्षेत्रों में वर्तमान सीवेज उपचार संयंत्रों का उन्नयन करने के साथ-साथ नए सीवेज उपचार संयंत्र स्थापित करने के निर्देश दिए हैं । उन्होंने बताया कि इसके फलस्वरूप गत एक वर्ष में 119.5 एमएलडी क्षमता के 13 नए सीवेज उपचार संयंत्र स्थापित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, इन विभागों द्वारा 306.95 एमएलडी क्षमता के 41 नए सीवेज उपचार संयंत्र निर्माणाधीन हैं और 679.06 एमएलडी क्षमता के 49 नए सीवेज उपचार संयंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सीवेज उपचार संयंत्रों की स्थापना से ड्रेनों एवं नदियों में प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी। 
उन्होंने बताया कि बोर्ड ने शहरी स्थानीय निकाय विभाग को नगरपालिकाओं में ठोस कचरा उपचार एवं निपटान सुविधाएं उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए है। गत एक वर्ष के दौरान करनाल में कुल 150 टन प्रतिदिन की क्षमता वाली ऐसी एक सुविधा शुरू की गई है। उन्होंने कहा कि इससे करनाल शहर की पारिस्थितिकी में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि लोगों, विश्ेाषकर किसानों को धान या गेहूं अवशेषों को जलाने से उत्पन्न होने वाली समस्या से अवगत कराने के मद्देनजर क्षेत्रों में क्षेत्रीय अधिकारियों के माध्यम से मंडल एवं उप-मंडल स्पर पर बैठकें एवं संगोष्ठिïयां आयोजित की गई हैं। इसके अतिरिक्त, लोगों को इस समस्या से अवगत कराने के लिए जनसम्पर्क कार्यक्रम आयोजित करने मे जिला प्रशासन का सहयोग भी लिया जा रहा है। 

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