Friday, July 29, 2016

दिल्ली-आगरा के बीच सेमी-हाई स्पीड गतिमान एक्सप्रेस चालू




नईदिल्ली-जुलाई29,2016(abtaknews.com)भारतीय रेल हाई स्पीड रेल गाड़ी (300 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक गति), सेमी-हाई स्पीड रेल गाड़ी (160 किलोमीटर प्रतिघंटा + से 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति), मौजूदा गाड़ियों की गति बढ़ाने और तेज गति की गाड़ियां चलाने के संबंध में बहु-कोणीय रणनीति पर काम कर रही है।मुम्बई-अहमदाबाद हाई स्पीड गलियारे के लिए जापान के वित्तीय और तकनीकी सहयोग से एक हाई स्पीड रेल गाड़ी (300 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक गति) को स्वीकृति दे दी गई है। यह गाड़ी जापानी शिनकानसेन हाई स्पीड प्रौद्योगिकी पर आधारित है। इस परियोजना को पूरा करने के लिए नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड नामक एक कंपनी बनायी गई है। इस परियोजना का कार्यान्वयन हो रहा है और वर्ष 2023-24 में इसे चालू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह की हाई स्पीड रेल गाड़ी को आमतौर पर बुलेट ट्रेन के रूप में जाना जाता है और इसका अध्ययन जेआईसीए द्वारा किया जा चुका है। परियोजना के लिए जापान सरकार ऋण के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। इस सहायता के तहत परियोजना लागत का 81 प्रतिशत जापान सरकार ऋण प्रदान करेगी, जिस पर 0.1 प्रतिशत प्रतिवर्ष के हिसाब से मामूली ब्याज देय होगा। इस ऋण को 50 वर्षों में चुकाया जाना है। चुकाने की प्रक्रिया 15 वर्षों के बाद शुरू होगी। 
मुम्बई-अहमदाबाद हाई स्पीड गलियारे (300 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक गति) के अलावा हीरक चतुर्भुजीय और अर्ध-कोणीय क्षेत्रों के संबंध में 5 अन्य गलियारों की संभावना खोजी जा रही है। इसके संबंध में अध्ययन के लिए सलाहकारों को नियुक्त किया गया है। इसका ब्यौरा इस प्रकार है : - 
क्र.स.
हाई स्पीड गलियारा
व्यवहार्यता अध्ययन के लिए सलाहकार
1
दिल्ली – मुम्बई
मैसर्स दी थर्ड रेलवे सर्वे एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट ग्रुप कॉरपोरेशन (चीनी सलाहकार) और लेहमेयर इंटरनेशनल (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, भारत का संकाय। अंतरिम रिपोर्ट-1 प्राप्त। अंतरिम रिपोर्ट-2 नवम्बर, 2016 में अपेक्षित। अंतिम रिपोर्ट जनवरी, 2017 में अपेक्षित।
2
मुम्बई - चेन्नई
मैसर्स सिस्ट्रा (फ्रांसीसी सलाहकार), राइट्स और अर्नस्ट एंड यंग एलएलपी का संकाय। अंतरिम रिपोर्ट-1 प्राप्त। अंतरिम रिपोर्ट-2 नवम्बर, 2016 में अपेक्षित। अंतिम रिपोर्ट जनवरी, 2017 में अपेक्षित।
3
दिल्ली -  कोलकाता
मैसर्स आईएनसीओ-मैसर्स टीवाईपीएसए – मैसर्स इंटरनेशनल कंस्लटेंट्स एंड टेक्नोक्रेट्स प्राइवेट लिमिटेड (स्पेनी सलाहकार) का संकाय। अंतरिम रिपोर्ट-1 और 2 प्राप्त। अंतिम रिपोर्ट जनवरी, 2017 में अपेक्षित।
4
दिल्ली - नागपुर
चीनी रेलवे कंपनी के साथ सरकार से सरकार के बीच सहयोग। शुरूआती रिपोर्ट प्राप्त।
5
मुम्बई - नागपुर
स्पेनी रेलवे कंपनियों के साथ सरकार से सरकार के बीच सहयोग। अंतरिम रिपोर्ट-1 प्राप्त। अंतरिम रिपोर्ट-2 नवम्बर, 2016 में अपेक्षित। अंतिम रिपोर्ट जनवरी, 2017 में अपेक्षित।

रेलवे ने सेमी-हाई स्पीड रेल गाड़ियां (160 किलोमीटर प्रतिघंटा + से 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति) चलाने का बड़े पैमाने पर कार्यक्रम तैयार किया है। उल्लेखनीय है कि हजरत निजामुद्दीन से आगरा कैंट स्टेशन के बीच 160 किलोमीटर प्रतिघंटा अधिकतम गति वाली गतिमान एक्सप्रेस को 5 अप्रैल, 2016 से शुरू कर दिया गया है। दिल्ली -  आगरा सेमी–हाई स्पीड गलियारे के अलावा 8 अन्य सेमी-हाई स्पीड गलियारों की पहचान की जा रही है, जिसका ब्यौरा इस प्रकार है : -

क्र. स.
गलियारा
जोनल रेलवे
स्थिति




1
दिल्ली - चंडीगढ़
उत्तरी
लागत साझा आधार पर सीएनसीएफ (फ्रांस) को व्यवहार्यता सह कार्यान्वयन अध्ययन सौंपा गया।
2
चेन्नई – बैंग्लुरू - मैसूर
दक्षिणी, दक्षिण - पश्चिमी
चीनी रेलवे के ईआरवाईयूएएन ग्रुप को उनकी लागत पर गति उन्नयन के लिए व्यवहार्यता अध्ययन सौंपा गया।
3
दिल्ली - कानपुर
उत्तरी, उत्तर - मध्य


संबंधित जोनल रेलवे और कोंकण रेलवे ने 160 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति बढ़ाने की निशानदेही की है, जिसके लिए तकनीकी इनपुट्स आवश्यक हैं।
4
नागपुर - बिलासपुर
दक्षिण पूर्व मध्य
5
मुम्बई - गोवा
मध्यदक्षिण - पश्चिमी,कोंकण रेलवे
6
मुम्बई - अहमदाबाद
पश्चिमी
7
चेन्नई - हैदराबाद
दक्षिणीदक्षिण मध्य
8
नागपुर- सिकंदराबाद
मध्य, दक्षिण मध्य
मौजूदा नई दिल्ली – मुम्बई गलियारे के संबंध में यात्रा समय बचाने के उद्देश्य से भारतीय रेल स्पेनी टेलगो कोचों के इस्तेमाल पर परिक्षण कर रही है। ये तेज रफ्तार की गाड़ियां होंगी जो लगभग 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेंगी।भारतीय रेल बिजली से चलने वाली आधुनिक ईएमयू गाड़ियों को प्राप्त करने के प्रस्ताव पर भी काम कर रही है, जिनकी बेहतर औसत रफ्तार से यात्रा समय में काफी कमी आ जाएगी। 
भारतीय रेल की मौजूदा गाड़ियों की गति बढ़ाने के संबंध में रेल बजट 2016-17 में मिशन रफ्तार की घोषणा की गई थी। इस मिशन के तहत अगले पांच सालों में माल गाड़ियों की औसत रफ्तार को दोगुना करने और गैर-शहरी पैसेंजर गाड़ियों की औसत रफ्तार में 25 किलोमीटर प्रतिघंटा तक का इजाफा करने का लक्ष्य रखा गया है। उल्लेखनीय है कि इस समय गैर-शहरी पैसेंजर गाड़ियों की औसत रफ्तार 46.3 किलोमीटर प्रतिघंटा और माल गाड़ियों की औसत रफ्तार 24.2 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इसके क्रियान्वयन के लिए रेलवे बोर्ड में एक बहु-उद्देशीय मिशन निदेशालय गठित किया गया है। 
गाड़ियों की औसत रफ्तार बढ़ाने और उनकी गतिशीलता में सुधार के लिए कार्य योजना तैयार की गई है। इसमें गति बाध्यताओं को दूर करना, पुलों के ऊपर (आरओबी) और पुलों के नीचे (आरयूबी) सड़क बनाना, गाड़ियों की सही शक्ति, वैगनों में ट्विन-पाइप ब्रेक प्रणाली लगाना, गाड़ियों की पारंपरिक लोको प्रणाली की जगह मेन लाइन इलेक्ट्रीक मल्टीपल यूनिट (एमईएमयू) और डीजल इलेक्ट्रीक मल्टीपल यूनिट (डीईएमयू) की शुरूआत करना शामिल है।भारतीय रेल में गतिशीलता सुधार की कुछ प्रमुख उपलब्धियां इस प्रकार हैं 
·         पारंपरिक लोको चालित पैसेंजर गाड़ियों की जगह कानपुर-इलाहाबाद सेक्शन में दोतरफा और आसनसोल-धनबाग सेक्शन में एक जोड़ा एमईएमयू गाड़ी की शुरूआत की जा चुकी है।
·         इलाहाबाद-मुगलसराय में दो अन्य युगल गाड़ियों को जुलाई, 2016 में एमईएमयू में बदलने का कार्यक्रम तय।
·         भारी यातायात वाले गाजियाबाद-इलाहाबाद-मुगलसराय सेक्शन का गतिशीलता अध्ययन पूरा। अल्पकालीन कार्य योजना क्रियान्वयन के तहत।
·         सभी मालगाड़ियों के लिए ट्विन-पाइप ब्रेक प्रणाली के क्रियान्वयन को सैद्धांतिक मंजूरी। इस प्रणाली से ब्रेक आसानी और कारगर तरीके से काम करता है और माल गाड़ियों की गति दुरुस्त रहती है।
·         माल गाड़ियों की सही शक्ति के लिए कार्य योजना बनायी जा रही है। माल से लदे डिब्बों को खींचने के लिए आदर्श हार्सपावर से माल गाड़ियों की गति बढ़ेगी और यातायात समय में कमी आयेगी। इससे ग्राहकों को सीधा फायदा होगा।
·         तेज गति के लिए रेलवे क्रासिंगों को हटाना और 2787 रेलवे क्रासिंगों की सुरक्षा में सुधार करना उपलब्धियों में शामिल है। वर्ष 2016-17 तक इन्हें हटाने का लक्ष्य रखा गया है। 
उपरोक्त उपायों के अलावा रेल मंत्रालय ने तेजस जैसी तेज रफ्तार गाड़ियों को चलाने की घोषणा की है। इन गाड़ियों की गति 130 किलोमीटर प्रतिघंटा से अधिक रखने का लक्ष्य है और इसके लिए न्यूनतम प्रौद्योगिकीय इनपुट्स की आवश्यकता है।  

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