Sunday, July 24, 2016

मोदी सरकार ने बड़े-बड़े धन्ना सेठों के 6 लाख करोड़ के टैक्स माफ किए;-भाकपा



फरीदाबाद, 24 जुलाई,2016(abtaknews.com) भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) के राज्य कमेटी सदस्य का. इन्द्रजीत ने कहा कि कांग्रेस मुक्त भारत का नारा देने वाली भाजपा की सरकारें कांग्रेस की उन्हीं पूंजीपति परस्त नीतियों को और भी आक्रामक ढंग से लागू करके जनता की रोजी-रोटी पर हमला बोल रही है। मोदी सरकार ने मनमोहन सरकार से भी आगे बढक़र बड़े-बड़े धन्ना सेठों के सालाना 6 लाख करोड़ से ज्यादा के टैक्स माफ किए हैं। इस तरह बैंकों में रखी जनता की गाढ़ी कमाई का 8.5 लाख करोड़ रुपए चंद घराने लौटा नहीं रहे हैं। उन्होंने यह खुलासा चिमनीबाई धर्मशाला के समक्ष शनिवार देर सायं जिला कमेटी के सचिव शिव प्रसाद की अध्यक्षता में आयोजित जनसभा को सम्बोधित करते हुए किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई किसान बैंक का कर्ज नहीं लौटाता तो उसकी जमीन कुर्क कर ली जाती है। भाजपा सरकार ने तो उसे पंचायत चुनाव लडऩे के अयोग्य करार दिया है, जबकि इन कर्जदार घरानों से कर्ज उगाही की कोई कार्यवाही करने की बजाय इनके नाम तक मोदी सरकार नहीं बता रही है। उन्होंने मोदी सरकार से सवाल किया कि क्या यह भ्रष्टाचार नहीं है? क्या इसे काला धन को बढ़ावा देना नहीं माना जाएगा ? उन्होंने कहा कि सरकार की नवउदारीकरण की नीतियों के कारण ही महंगाई व बेरेाजगारी लगातार बढ़ रही है। जनता में बढ़ रहे असंतोष व आक्रोश की दिशा भ्रमित करने के लिए सरकार जाति एवं साम्प्रदायिक आधार पर धू्रवीकरण करने के प्रयास कर रही है। शिक्षा व चिकित्सा आदि बुनियादी सेवाओं को भी निजी हाथों में सौंपा जा रहा है। गरीब लोग बिना ईलाज के मर रहे हैं और शिक्षा इतनी महंगी हो गई है कि आम गरीब के बच्चे इससे वंचित हो रहे हैं। शिक्षा पर पूरी तरह शिक्षा माफियाओं का कब्जा हो गया है और सरकार हरियाणा एजूकेशन एक्ट को इनसे लागू करवाने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार दलित, किसान व महिला विरोधी है। उन्होंने गुजरात में दलित नौजवानों की गौरक्षकों द्वारा की गई बेरहमी से पिटाई की घोर निंदा की और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही करने की मांग की।
जिला कमेटी सदस्य के डी मिश्रा ने कहा कि राज्य की खट्टर सरकार ने सफाई कर्मचारियों सहित अन्य कर्मचारियों की सेवाएं नियमित करने, 15 हजार रुपए न्यूनतम वेतनमान देने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, बेरोजगारों को 6 व 9 हजार रुपए बेरोजगारी भत्ता देने आदि वायदे किए थे। लेकिन सरकार ने चुनाव पूर्व किए एक भी वायदे पर अमल नहीं किया। इसके विपरीत हजारों ठेका कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया। उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि जब बिजली सरप्लस है तो बिजली के कट क्यों लगाए जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि सीपीआईएम के 4 जत्थे सरकार की पूंजीपरस्त नीतियों की पोल खोलने के लिए सभी जिलों व खण्डों में जनसभाएं आयोजित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आरक्षण के नाम पर एक समुदाय को दूसरे से लड़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने आरक्षण समर्थक व विरोधियों से सवाल किया कि सरकारी विभाग बंद हो रहे हैं और पक्की नौकरियों की जगह सरकार ठेके पर भर्तियां कर रही है, तो आरक्षण का लाभ कैसे मिलेगा ? उन्होंने आरक्षण की लड़ाई से पहले सरकारी विभागों को बचाने की लड़ाई लडऩे पर जोर दिया। जनसभा को सीपीआईएम की जिला कमेटी के सदस्य के डी मिश्रा, विजय कुमार झा, नवल सिंह, मन्जू व सीपीआई के जिला सचिव का. बेचूगिरी आदि ने सम्बोधित किया।


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